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आर्म्स डीलर संजय भंडारी की मुश्किलें बढ़ीं; संपत्ति जब्ती पर 22 अगस्त को राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी सुनवाई

राऊज एवेन्यु कोर्ट आर्म्स डीलर संजय भंडारी की संपत्ति जब्त करने की ईडी की मांग वाली याचिका पर 22 अगस्त को सुनवाई करेगा. इससे पहले कोर्ट ने ईडी की मांग पर संजय भंडारी की कुछ संपत्तियों को दर्ज करने का आदेश दिया था. बाकी संपत्तियों की जब्ती पर 22 अगस्त को विचार करेगा. हालांकि संजय भंडारी के वकील ने ईडी की इस मांग का विरोध किया था.

हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने संजय भंडारी को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था. साथ ही कोर्ट ने संजय भंडारी द्वारा टैग हटाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा था कि दायर याचिका में मेरिट नही है, लिहाजा याचिका को खारिज किया जाता है.

संपत्तियों पर किसी तीसरे पक्ष ने दावा नहीं किया- ईडी

राऊज एवेन्यु कोर्ट में सुनवाई के दौरान संजय भंडारी की ओर से पेश वकील ने ईडी द्वारा दाखिल हलफनामे में संलग्न दस्तवेज़ों पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था कि इन दस्तावेजों को अदालत में इस्तेमाल करने की अनुमति नही दी जानी चाहिए. उनकी दलील थी कि ईडी मूल दस्तवेज़ों से अलग नए दस्तावेज दाखिल कर रही है, जिसकी इजाजत कोर्ट को नहीं देनी चाहिए. ईडी की दलील थी कि जिन संपत्तियों की लिस्ट बनाई गई है, उन पर किसी भी तीसरे पक्ष ने आपत्ति नहीं जताई है. इससे जब्ती का रास्ता और आसान हो गया है.

ईडी ने दलील दी थी कि भंडारी ने अपराध से अर्जित धन को इन संपत्तियों में लगाया था और अब इन्हें जब्त करना कानूनन जरूरी है. संजय भंडारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज है और वह 2016 में ब्रिटेन भाग गया था. उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी हुआ था. हालही में ब्रिटेन की अदालत ने उसके प्रत्यर्पण से संबंधित ईडी की याचिका को खारिज कर दिया था.

2015 से जांच के घेरे में संजय भंडारी

आयकर विभाग ने उसके खिलाफ 2015 में मुकदमा दर्ज किया था, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज किया था. उस पर काला धन को विदेश भेजने, टैक्स की चोरी करने और रक्षा सौदों में रिश्वत लेने का आरोप है. भंडारी को 2020 में ब्रिटेन की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. भंडारी के वकील ने 19 अप्रैल को भगोड़ा घोषित करने की मांग का विरोध किया था और कहा था कि ब्रिटेन में वह कानून के तहत रह रहा है. लंदन हाई कोर्ट ने उसे भारत प्रत्यर्पित करने से मना कर दिया है.

भंडारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने यह भी कहा था कि उनके मुवक्किल का ब्रिटेन में रहना पूरी तरह वैध है और भारत सरकार यूके की अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकती है.

ये भी पढ़ें: खनिज अधिकार मामले में बड़ा उलटफेर; कोर्ट ने इस कानून को बताया असंवैधानिक

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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