Bharat Express DD Free Dish

खनिज अधिकार मामले में बड़ा उलटफेर; कोर्ट ने इस कानून को बताया असंवैधानिक

Kerala High Court: केरल हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में ‘केरल मिनरल्स एक्ट 2011’ को असंवैधानिक घोषित कर दिया है. अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 300A का उल्लंघन माना है. इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को झटका देते हुए भूमि मालिकों से वसूली गई रॉयल्टी की रकम को तीन महीने के भीतर वापस करने का आदेश दिया है.

Kerala High Court
Edited by Shubhra Rai

Kerala High Court: केरल हाईकोर्ट ने खनिज अधिकार कानून को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने केरल मिनरल्स (वेस्टिंग ऑफ राइट्स) एक्ट 2011 को असंवैधानिक घोषित कर दिया है. अदालत ने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14,19 21 और 300A का उल्लंघन करता है.

क्या है मामला?

जस्टिस ए. के. जयशंकर नांबियार और जस्टिस ए. के. प्रीथा की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है .अदालत ने मालाबार क्षेत्र के भूमि मालिकों की ओर से दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए पहले के सिंगल पीठ के फैसले को रद्द कर दिया, जिसने इन कानून को वैध माना था. अदालत ने केरल सरकार को निर्देश दिया है कि इस कानून के तहत भूमि मालिकों से वसूली गई रॉयल्टी की राशि तीन महीने के भीतर वापस की जाए. दरअसल वर्ष 2021 में बने इस कानून के जरिए 30 दिसंबर 2019 से प्रभावी मानते हुए मालाबार क्षेत्र की जमीन के ऊपर और नीचे मौजूद सभी खनिजों पर अधिकार राज्य सरकार को दे दिया गया था.

सरकार का तर्क था कि,

इससे मालाबार क्षेत्र को पूर्ववर्ती त्रावणकोर कोचिन क्षेत्र के समान कानूनी स्थिति मिलेगी, जहां पहले से ही खनिज अधिकार राज्य के पास थे. इसके खिलाफ भूमि मालिकों ने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि कानून में भूमि मालिकों से उनके खनिज अधिकार छीन जाने के बदले मुआवजा देने की कोई स्पष्ट व्यवस्था व्यवस्था नहीं है. इसलिए यह अनुच्छेद 300 A के तहत किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित करने के लिए वैध कानून नहीं माना जा सकता.

सुनवाई का अवसर और उचित मुआवजा में पालन नहीं

कोर्ट ने यह भी कहा कि संपत्ति के अधिकार से जुड़े आवश्यक संरक्षण, जैसे नोटिस, सुनवाई का अवसर और उचित मुआवजा में स्व किसी का भी पालन नहीं किया गया. केरल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रमुख खनिजों पर अधिकार केंद्र सरकार के खनिज एवं खनिज अधिनियम 1957 के तहत आते हैं. ऐसे में राज्य सरकार इस क्षेत्र में कानून बनाकर अधिकार अपने पास नहीं ले सकती. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस कानून को केवल लघु खनिजों तक सीमित मान भी लिया जाए, तब भी बिना मुआवजे के अधिकार छीनने के कारण यह कानून असंवैधानिक ही रहेगा.

यह भी पढ़ें: संत रामपाल को बड़ा झटका: हाईकोर्ट का कड़ा रुख, सोलन कोर्ट की कार्यवाही पर लिया ये बड़ा एक्शन

-भारत एक्सप्रेस  



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read

Latest