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20 साल का इंतजार और सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; मुश्किल में फंसे इस नामी डेवलपर के डायरेक्टर

Real Estate Fraud Case: गुरुग्राम के पार्श्वनाथ एक्सोटिका प्रोजेक्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज करने के साथ ही उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है.

CJI Suryakant
Edited by Shubhra Rai

Real Estate Fraud Case: सुप्रीम कोर्ट से पार्श्वनाथ डेवलपर्स को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों के बैंक खातों पर रोक लगा दिया है. साथ कोर्ट ने कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है. कोर्ट वरिष्ठ नागरिकों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया है.

कोर्ट को स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर संदेह

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने अगली सुनवाई में डायरेक्टर को पेश होने के लिए कहा है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर बिल्डर के साथ साठगांठ का गंभीर संदेह जताया है. यह मामला रीता टिक्कू (जो कैंसर से उबरी हैं) और लोकेश टिक्कू की याचिका से जुड़ा है. उन्होंने गुरुग्राम के सेक्टर 53 में पार्श्वनाथ एक्सोटिका परियोजना में अपने जीवन भर की बचल लगाई थी.

रीख से 36 महीने के भीतर कब्जा दिया जाएगा

याचिका सीनियर सिटीजन एसोसिएशन की ओर से दायर की ओर से याचिका पर सुनवाई करेगा. इन लोगों ने करीब दो दशक पहले ही घर की पूरी कीमत चुका दी थी, लेकिन उन्हें अभी तक अपने फ्लैट का कब्जा नहीं मिल पाया है. जबकि शर्त यह थी कि प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीख से 36 महीने के भीतर कब्जा दे दिया जाएगा. यह समय सीमा 2013 में पूरी हो गई थी.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा कि पार्श्वनाथ डेवलपर्स ने कई प्रोजेक्ट को समय पर पूरा नहीं किया तो इसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नही की गई? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि बिल्डर मुख्य रूप से हरियाणा में काम कर रहे हैं, इसलिए हम हरियाणा राज्य के सीएस, डीजीपी, सभी कलेक्टर्स, सभी कमिश्नर्स, एसपी और सभी बैंकों को निर्देश का पालन करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.

न कोई कानूनी अपील की और न मुआवजा दिया

याचिककर्ताओ को साल 2006 में अस्थायी रूप से फ्लैट अलॉट किए गए थे और 2007 की शुरुआत में फ्लैट खरीदने के एग्रीमेंट किए गए थे. हर फ्लैट की कीमत 1 करोड़ रुपए से अधिक थी और कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक 2013 में कब्जा मिलना था.

हालांकि जब खरीदार निर्माणस्थल पर गए, तो उन्होंने पाया कि कंस्ट्रक्शन का काम अभी बहुत अधूरा था. याचिककर्ताओ ने साल 2021 में हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (हरेरा) से अपने पक्ष में हर्जाने का आदेश हासिल किया था. इसके बावजूद बिल्डर ने न तो इस आदेश के खिलाफ कोई कानूनी अपील की और न ही खरीदारों को मुआवजा दिया. सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालती आदेशों को लागू कराने की प्रक्रिया अब केवल एक औपचारिक औपचारिकता बनकर रह गई है.क्योंकि हरेरा द्वारा जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट पर भी कोई कार्रवाई नही की गई.

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-भारत एक्सप्रेस 



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