लीगल

मद्रास HC का बड़ा फैसला: ‘अपील लंबित होने पर भी कैदियों को मिलेगी छुट्टी, जेल में खत्म नहीं होते मौलिक अधिकार’

Madras High Court: मद्रास हाईकोर्ट ने कैदियों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है. मद्रास हाईकोर्ट के पांच जजों की पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि जेल में बंद होने का मतलब यह नहीं है कि मौलिक अधिकार सिर्फ कागजी वादे बनकर रह जाए, इन अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 226 के तहत इस कोर्ट की शक्ति हमारे संविधान के मूल ढांचे का एक अटूट हिस्सा है. इसलिए छुट्टी और अस्थायी रिहाई मानवीय गरिमा के पहलू हैं, जिन्हें सिर्फ न्यायिक अपील लंबित होने से अनिश्चित काल के लिए रोका नहीं जा सकता.

मामला तमिलनाडु सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस रूल्स की व्याख्या से जुड़ा

मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने यह फैसला सुनाया है. फैसला सुनाने वाले जजों में जस्टिस सी. वी. कार्तिकेयन, जस्टिस ए. डी. जगदीश चंद्रा, जस्टिस एम निर्मल कुमार और जस्टिस सुंदर मोहन शामिल थे. कोर्ट ने यह फैसला शीफ रानी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है. यह मामला तमिलनाडु सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस रूल्स 1982 की व्याख्या से जुड़ा था.

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इस विषय से जुड़े व्यापक मुद्दों, पैरोल, फरलो और रिमिशन नीतियों पर सुप्रीम कोर्ट में मुकेश कुमार बनाम एनसीटी ऑफ दिल्ली का मामला लंबित है. कोर्ट ने कहा क्या तमिलनाडु सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस रूल्स 1982 के नियम 40 के तहत छूट देने की शक्ति का इस्तेमाल राज्य सरकार द्वारा किसी कैदी को उन नियमों के दायरे से बाहर छुट्टी देने के लिए किया जा सकता है, जब उसकी सजा के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सामने लंबित हो? कोर्ट ने यह भी कहा है कि कानूनी अनिश्चितता के कारण कैदियों की स्वतंत्रता और अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए.

पूर्व आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक के.एम नानावटी बनाम बॉम्बे मामले में दिए गए फैसले को छुट्टी देने पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जा सकता. अदालत ने कहा कि नानावटी मामला अलग परिस्थितियों से जुड़ा था, जहां राज्यपाल ने सजा को निलंबित किया था, जबकि वर्तमान विवाद वैधानिक जेल नियमों के तहत अस्थायी रिहाई से संबंधित है. अदालत ने नवंबर 2025 के उस पूर्व आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया, जिसमें हाई कोर्ट रजिस्ट्री को ऐसे अवकाश संबंधी आवेदन स्वीकार करने से रोका गया था.

साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह टी रामलक्ष्मी फैसले के अनुसार ऐसी याचिकाएं स्वीकार करें. अदालत ने तमिलनाडु जेल प्रशासन को भी निर्देश दिया है कि वे साधारण और आपातकालीन छुट्टी की अर्जियों पर फैसला लें.

यह भी पढ़ें:  अल फलाह यूनिवर्सिटी के मालिक जावेद सिद्दीकी की जमानत पर फंसा पेच, ईडी ने कोर्ट में खोली 415 करोड़ के घोटाले की पोल

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

संघ की ‘असंतुलित’ टिप्पणी से सत्ता, संगठन और सामाजिक संतुलन की परीक्षा

RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने यूजीसी के समानता विनियम-2026 को असंतुलित बताया. संघ…

1 hour ago

चंडीगढ़ से अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला: NDIA ब्लॉक की रैली को बताया सिखों का अपमान

चंडीगढ़ में अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए 1984 सिख…

2 hours ago

चौरी-चौरा के बहाने नेहरू पर सीएम योगी का हमला; बोले- 172 क्रांतिकारियों की पैरवी नहीं की, मालवीय ने 151 को फांसी से बचाया

चौरी-चौरा में 288 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री…

2 hours ago

AIIA-iCAINE के 6 साल पूरे: आयुर्वेद और AI को जोड़ने की बड़ी पहल, IIT बॉम्बे के साथ राष्ट्रीय चैलेंज लॉन्च

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के इनक्यूबेशन सेंटर AIIA-iCAINE ने अपने छठे स्थापना दिवस पर…

3 hours ago

डिग्री से मार्कशीट तक, हर जगह सिर्फ Bharat; महात्मा ज्योतिबा फूले रूहेलखंड विश्वविद्यालय में India शब्द खत्म, दस्तावेजों में दिखेगा भारत

महात्मा ज्योतिबा फूले रूहेलखंड विश्वविद्यालय ने कई बड़े फैसले लिए हैं. अब विश्वविद्यालय की डिग्री…

3 hours ago