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‘विदेशी साजिश या कुछ और?’… NEET प्रदर्शनों की NIA जांच पर क्यों पीछे हटे याचिकाकर्ता?

NEET UG Paper Leak Protest: नीट यूजी पेपर लीक को लेकर हो रहे प्रदर्शन और संसद चलो मार्च की एनआईए जांच की मांग वाली याचिका को याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाई कोर्ट से वापस ले लिया है. मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एनआईए जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी करने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग पर याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी.

याचिकाकर्ता याचिका को वापस लेना चाहता है

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा कि याचिकाकर्ता इस याचिका को वापस लेना चाहता है. साथ ही उसे कानून के तहत उपलब्ध दूसरे कानूनी उपाय अपनाने की छूट दी जाए, जिसमें संबंधित अधिकारियों के पास जाने का विकल्प शामिल है. इसपर हाई कोर्ट ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को कानून के तहत उपलब्ध अन्य कानूनी विकल्प अपनाने की अनुमति दे दी. यह याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल के वकील बरूण सिन्हा ने दायर की थी.

विदेशी फंडिंग की जांच की मांग की गई

दायर याचिका में नीट विरोध प्रदर्शन के लिए कथित विदेशी फंडिंग की जांच की मांग की गई थी. जनहित याचिका में दावा किया गया था कि यह विरोध प्रदर्शन एक साजिश थी. जिसमें विदेशी फंडिंग वाले लोग शामिल थे और शहर को बंधक बना लिया गया था. दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि जंतर-मंतर पर शुरू हुआ प्रदर्शन बाद में राजनीतिक रंग ले बैठा और 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, पत्रकारों पर हमले, एम्बुलेंस का रास्ता रोकने और संसद की ओर बढ़ने जैसी घटनाएं हुई.

याचिकाकर्ता का दावा था कि,

इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है. दायर याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूमिका और उनके कुछ विदेशी संगठनों से कथित संबंधों का भी उल्लेख किया गया है. याचिकाकर्ता ने इन पहलुओं की भी जांच कराने की मांग की गई है. हालांकि दस्तावेज में ये आरोप याचिकाकर्ता के दावे के रूप में दर्ज हैं और इन पर किसी अदालत या जांच एजेंसी की पुष्टि का उल्लेख नहीं है.

याचिकाकर्ता के अनुसार,

प्रदर्शन के दौरान कई राजनीतिक दलों के नेताओं की मौजूदगी से यह आंदोलन छात्रों का न रहकर राजनीतिक आंदोलन बन गया. इसमें आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के नेताओं का भी जिक्र किया गया है. याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि 20 जुलाई की घटनाओं की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी या किसी अन्य विशेष एजेंसी से कराई जाए, दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज सभी एफआईआर उस एजेंसी को सौंपी जाए और हिंसा, तोड़फोड़ व अन्य कथित अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिया जाए.

यह भी पढ़ें- जंतर-मंतर पर छात्रों से मारपीट मामला: सीजेआई बोले- मीडिया ने बिना जांचे चलाई भ्रामक खबरें, जानिए क्या था पूरा माजरा

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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