सरकारी आवास पर मिले जला हुआ कैश के मामले में Allahabad High Court के Justice Yashwant Verma ने दायर याचिका पर सीजेआई बी आर गवई से जल्द सुनवाई की मांग की है. सीजेआई गवई ने कहा कि वो सुनवाई नही कर सकते है, क्योंकि वो खुद समिति के गठन में शामिल रहे है.
इसको लेकर जल्द नई बेंच का गठन किया जाएगा. वर्मा की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की. वर्मा की ओर से पेश होने वाले वकीलों में कपिल सिब्बल के अलावे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी, वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी, वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा, वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल सहित अन्य वकील पेश हुए.
मेंशिंग के दौरान वकीलों ने कहा कि इसमें कुछ संवैधानिक मुद्दे हैं, मैं आपसे जल्द से जल्द एक पीठ गठित करने का अनुरोध करता हूं. दायर याचिका में जस्टिस वर्मा ने इन-हाउस-कमेटी की रिपोर्ट को अमान्य करार देने की मांग की है.
जस्टिस वर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को 8 मई को दी गई सिफारिश को रद्द करने की मांग की है. जस्टिस वर्मा ने यह भी कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिए बिना ही दोषी ठहराया गया है.
उन्होंने कहा कि सीजेआई द्वारा गठित इन-हाउस-कमेटी के तीनों सदस्यों ने निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिए बिना ही अंतिम नतीजे पर पहुच गए. जस्टिस वर्मा का मानना है कि कमेटी 14 मार्च को देखे गए कथित कैश से संबंधित तथ्यों को
जांचने में विफल रही है. जबकि दोषसिद्धि के लिए यह आवश्यक है.
55 गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और फायर ब्रिगेड स्टाफ के बयानों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के पैनल ने जस्टिस वर्मा और उनके परिवार को प्रत्यक्ष रूप से कैश रखने का जिम्मेदार ठहराया. पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आग के बाद रातों-रात कैश को हटाया गया और जानबूझकर सबूत नष्ट किए गए थे.
न्यायिक पद के दुरुपयोग पर समिति ने दी सख्त टिप्पणी
समिति ने बयान के अलावा वीडियो रिकॉर्डिंग भी किया, ताकि यह सुनिश्चित की जा सके कि इसे चुनौती न दी जा सके. समिति की 64 पेज की रिपोर्ट के अंत में दो पैराग्राफ हैं, जो यह निष्कर्ष निकालते हैं कि नकदी 30 तुगलक क्रिसेंट, नई दिल्ली के स्टोर रूम में पाई गई थी, जो आधिकारिक तौर पर जस्टिस वर्मा के कब्जे में था और यह स्टोर रूम तक पहुच जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों के गुप्त या सक्रिय नियंत्रण में पाई गई थी.
समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा 22 मार्च के पत्र में उठाए गए आरोपों में पर्याप्त तथ्य है और यह सही पाया गया है कदाचार इतना गंभीर है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता है.
14 मार्च को दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के बाहरी हिस्से में आग लगने की घटना के दौरान दमकल कर्मियों को बोरे में भरकर रखी गई जली हुई नकदी मिली थी.
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-भारत एक्सप्रेस