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म्यांमार में नागरिक विमान पर ड्रोन हमले में विदेशी नागरिकों का हाथ, NIA ने कोर्ट में किया बड़ा खुलासा

म्यांमार में हुए ड्रोन हमले से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने बड़ा खुलासा किया है. एनआईए ने कोर्ट को बताया कि मार्च में गिरफ्तार किए गए सात विदेशी नागरिक म्यांमार में एक नागरिक विमान हमले में संलिप्तता का संकेत मिला है.

गिरफ्तार सात विदेशियों में 6 यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक शामिल है. ये सभी फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है. पिछले दिनों कोर्ट ने दो आरोपियों से जेल में पूछताछ की अनुमति दी थी.

पूछताछ के बाद NIA ने सौंपा रिपोर्ट

एनआईए की ओर से 19 अगस्त को दायर अर्जी में कहा गया था कि केंद्र सरकार को भरोसेमंद जानकारी मिली है कि कुछ यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिक म्यांमार में नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले में शामिल रहे हैं. जिसके बाद निचली अदालत ने एनआईए को इनसे पूछताछ की अनुमति दी थी. इनसे पूछताछ के बाद एनआईए ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपा है.

एनआईए का आरोप है कि वैन डाइक और अन्य आरोपियों का भारत और म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़ी साजिश में शामिल रहे है. वही वैन डाइक के परिवार ने उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई है.

NIA को 90 दिन का मिला था समय

परिवार का दावा है कि उनके पैर में चोट, आंखों की रोशनी कमजोर होने और दवाइयों से जुड़ी समस्या है. परिवार का आरोप है कि वैन डाइक को तिहाड़ में.सीमित संपर्क की अनुमति है और उनकी 80 साल से अधिक उम्र की मां को उनसे केवल कुछ मिनट की आपातकालीन फोन कॉल की अनुमति मिली थी.

मामले में एनआईए ने सात लोगो को गिरफ्तार किया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इसकी जांच के लिए एनआईए को 90 दिन का समय दे दिया था. गिरफ्तार आरोपियों में छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक शामिल है. इनपर आरोप है कि ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और यहां से मिजोरम गए और वहां से गैरकानूनी तरीके से म्यामांर चले गए. इन लोगो पर आरोप है कि म्यामांर के एथेनिक ग्रुप के संपर्क मे थे. वहां आतंकी गुटों को हथियार चलाने और ड्रोन चलाने की ट्रैनिंग दिया था.

क्या है आरोप?

आरोप है कि इन लोगों ने यूरोप से ड्रोन मंगाए थे. म्यामांर से वापस इंडिया आने पर NIA ने इनको गिरफ्तार किया गया है. सूत्रों के अनुसार 8 अन्य यूक्रेनियन की तलाश जारी है. कुल 14-15 लोगों का ग्रुप था. ये लोग यूरोप से बड़े पैमाने पर ड्रोन पहुचा रहे थे, जो संभवतः भारत से जुड़े उग्रवादी समूहों तक पहुंच सकते थे.

फंडिंग के लिए पैसा कहां से आया? एनआईए इसका भी पता लगा रही है कि इसके पीछे कौन हैंडलर हैं? क्या, किसी देश का इसके पीछे हाथ है या फिर भारत की धरती से बाहर पनप रहे कुछ आतंकवादी संगठनों का? जिनके हैंडलरो ने यह कोशिश की.

बता दें कि आरोपी कई बार ट्रेनिंग देने आ चुके है. इस बार वे गुवाहाटी पहुचे और फिर मिजोरम से अवैध रूप से म्यामांर में घुसे, जहां ट्रेनिंग दी. भारत लौटने पर एनआईए ने 13 मार्च 2026 को उन्हें गिरफ्तार किया.

यह भी पढ़ें:कार्रवाई से पहले जज साहब का इस्तीफा: अब नहीं मिलेंगी पेंशन और सरकारी सुविधाएं?

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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