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देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित अन्य राज्यों से मांगा जवाब

देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा की पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे क्यों नही लगाए गए हैं? जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि सीसीटीवी फुटेज को किसी केंद्रीकृत स्थान या एजेंसी को भेजा जाना चाहिए, जहां निगरानी हों. कोर्ट ने कहा कि पुलिस थाने का पूछताछ कक्ष वह स्थान है, जहां सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए.

कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा कि राज्य सरकार ने जो हकफनामा दिया है उसके मुताबिक पूछताछ कक्ष में सीसीटीवी कैमरा नही है. कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे लगाने में लागत तो आएगी, लेकिन यह मानवाधिकार का सवाल है. कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित अन्य राज्यों से एक बार फिर जवाब मांगा है. कोर्ट 24 नवंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया था कि अब इस मामले में और देरी बर्दाश्त नही की जाएगी. इससे पहले इसको लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी देते हुए स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था.

ऑडियो की समस्या ने बढ़ाई चिंता

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा था कि अब भी देश भर में पुलिस थानों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकतर दफ्तरों में समुचित सीसीटीवी कैमरे नहीं है. जो कैमरे लगे भी है, वो या तो काम नहीं कर रहे है, उसकी गुणवत्ता भी घटिया है. कैमरे की क़्वालिटी इतनी खराब है कि उसकी ऑडियो अच्छी नही है. धुंधला दिखता है. सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में सीबीआई, ईडी औरएनआईए सहित अन्य जांच एजेंसियों के दफ्तर में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था.

पारदर्शिता रखने के लिए सीसीटीवी जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि देशभर के प्रत्येक थाने में, सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, मुख्य द्वार, लॉक-अप, कॉरिडोर, लॉबी और रिसेप्शन के अलावे कई अन्य जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था, ताकि कोई कैमरे की नजर से बच न सके. इसका उद्देश्य था कि हिरासत में होने वाली पूछताछ के दौरान पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार के मानवाधिकार उल्लंघन या पुलिस ज्यादती पर रोक लगाई जा सके. सीसीटीवी फुटेज का इस्तेमाल पुलिस जांच और अदालती कार्यवाही में किया जा सकता है. सीसीटीवी फुटेज से कई ऐसे अहम सबूत मिलते है जो किसी मामले में अंतर पैदा कर सकता है.

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भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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