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राशिद इंजीनियर की अंतरिम जमानत पर सुनवाई टली: दिल्ली हाई कोर्ट अब 28 अप्रैल को करेगा विचार

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 28 अप्रैल को सुनवाई करेगा. हालांकि मामले में सुनवाई आज होनी थी, लेकिन जज के छुट्टी पर रहने के कारण सुनवाई नहीं हो पाई. राशिद इंजीनियर ने पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें अंतरिम जमानत की मांग की गई थी.

मानवीय आधार पर जमानत की मांग

राशिद इंजीनियर ने अपने बीमार पिता को देखने के लिए अंतरिम जमानत की मांग की है. मामले की सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कोर्ट को बताया था कि उनके पिता अस्पताल में भर्ती हैं और वेंटिलेटर पर हैं, ऐसे में मानवीय आधार पर उन्हें तत्काल जमानत दी जाए. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राशिद इंजीनियर की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है. वहीं, एनआईए (NIA) ने अंतरिम जमानत का कड़ा विरोध किया. एजेंसी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सुझाव दिया कि जमानत के बजाय ‘कस्टडी पैरोल’ दी जा सकती है, जिससे राशिद इंजीनियर अपने पिता और परिवार के सदस्यों से मिल सकेंगे.

चुनाव में भागीदारी की अनुमति

इससे पहले कोर्ट ने इंजीनियर राशिद को हिरासत में रहते हुए संसद सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी. कोर्ट ने उन्हें 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक संसद के पूरे सत्र में शामिल होने की इजाजत दी थी. इसके अलावा, नवंबर 2025 में भी उन्हें संसद सत्र में हिस्सा लेने और सितंबर 2025 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने की अनुमति मिली थी. राशिद इंजीनियर को 2017 के आतंकी फंडिंग मामले में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत एनआईए ने गिरफ्तार किया था और वे साल 2019 से ही तिहाड़ जेल में बंद हैं.

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चुनावी जीत और आरोपों की पृष्ठभूमि

राशिद इंजीनियर ने 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तरी कश्मीर की बारामूला सीट से चुनाव लड़ा था और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को दो लाख से अधिक वोटों से हराया था. पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मसरत आलम, राशिद इंजीनियर और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. एनआईए के मुताबिक, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में हिंसा को अंजाम दिया, जिसके लिए 1993 में हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई थी.

गोपाल कृष्ण

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