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IRCTC घोटाला: लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव पर आरोप तय होने पर राऊज एवेन्यू कोर्ट 31 जुलाई को सुनाएगा फैसला

दिल्ली की प्रतिष्ठित राऊज एवेन्यू अदालत (Rouse Avenue Court) आईआरसीटीसी (IRCTC) होटल टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के गंभीर मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप (चार्जेस) तय करने को लेकर आगामी 31 जुलाई 2026 को अपना बड़ा फैसला सुनाएगी. इस हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामले में देश के पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित कुल 16 लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा विशेष अदालत में दाखिल की गई मुख्य चार्जशीट (आरोप पत्र) में लालू प्रसाद यादव के पूरे परिवार को कटघरे में खड़ा किया गया है.

दाखिल चार्जशीट में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, उनके दोनों बेटों— पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व तेज प्रताप यादव, और उनकी बेटियों— मीसा भारती व हेमा यादव को मुख्य रूप से नामजद आरोपी बनाया गया है. इनके अलावा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़े कुछ अन्य करीबी नेताओं, व्यवसायियों और संदिग्ध शेल कंपनियों के खिलाफ भी ईडी ने कड़ी कानूनी धाराओं में आरोप पत्र दायर किया है.

अदालत का बड़ा अवलोकन

विशेष अदालत ने इस मामले की पूर्व में हुई विस्तृत सुनवाइयों के दौरान आधिकारिक तौर पर यह माना था कि कथित टेंडर घोटाले की यह पूरी आपराधिक साजिश तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव की पूर्ण जानकारी और सहमति से रची गई थी. अदालत के सख्त अवलोकन के अनुसार, सरकारी टेंडर प्रक्रिया में अनुचित रूप से राजनीतिक हस्तक्षेप करने और निजी पक्षों को अवैध आर्थिक लाभ पहुँचाने के बदले में बेनामी संपत्तियां अर्जित करने के ये आरोप प्रथम दृष्टया बेहद गंभीर और विचारणीय हैं.

ट्रायल जारी, लगी हैं ये कड़ी धाराएं

उल्लेखनीय है कि इसी घोटाले से जुड़े केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के समानांतर मामले में लालू प्रसाद यादव सहित अन्य सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत द्वारा पहले ही आधिकारिक रूप से आरोप तय किए जा चुके हैं और वर्तमान में कोर्ट में इसका नियमित ट्रायल (मुकदमा) तेजी से चल रहा है. सीबीआई कोर्ट द्वारा जिन प्रमुख धाराओं के तहत लालू यादव पर आरोप तय किए गए थे, उनमें शामिल हैं:

  • भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी)
  • आईपीसी (IPC) की धारा 120B (आपराधिक साजिश)
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 13(2) और धारा 13(1)(d) (लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग व भ्रष्ट आचरण)

ईडी और सीबीआई के इन मामलों में नामजद अन्य सह-आरोपियों में आईआरसीटीसी के पूर्व ग्रुप जनरल मैनेजर (GGM) वीके अस्थाना, आर के गोयल, और ‘सुजाता होटल्स’ के प्रमोटर व निदेशक विजय कोचर तथा विनय कोचर भी प्रमुखता से शामिल हैं.

‘लैंड फॉर जॉब’ से बिल्कुल अलग है यह मामला

कानूनी तौर पर यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आईआरसीटीसी (IRCTC) का यह होटल घोटाला मामला, लालू परिवार के खिलाफ चल रहे ‘लैंड फॉर जॉब’ (जमीन के बदले नौकरी) घोटाले से पूरी तरह अलग और स्वतंत्र है. आईआरसीटीसी घोटाला वर्ष 2004 से 2009 के बीच की उस अवधि का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री के पद पर आसीन थे.

उस समय रेलवे बोर्ड ने एक नीतिगत फैसले के तहत भारतीय रेलवे की पूरी कैटरिंग (खान-पान) सेवा और रेलवे के प्रतिष्ठित हेरिटेज होटलों के संचालन का जिम्मा पूरी तरह से नवनिर्मित सार्वजनिक उपक्रम IRCTC को सौंप दिया था. इसी बदलाव के दौरान झारखंड की राजधानी रांची और ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में स्थित रेलवे के ऐतिहासिक ‘बीएनआर होटल्स’ (BNR Hotels) के व्यावसायिक रखरखाव, संचालन और आधुनिकीकरण के विकास को लेकर जारी किए गए सरकारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं, पक्षपात और नियमों को ताक पर रखने की बात सीएजी और जांच एजेंसियों के सामने आई थी.

इन 16 लोगों और कंपनियों पर है केस

इस पूरे सुनियोजित घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वर्ष 2017 में अपनी पहली विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी. इस मनी लॉन्ड्रिंग केस में कुल 16 आरोपियों को सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें शामिल हैं

लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी (Lara Projects LLP), सरला गुप्ता, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेमचंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, मेसर्स सुजाता होटल्स, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलान और कॉर्पोरेट इकाई मेसर्स अभिषेक इंफ्रास्ट्रक्चर/फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड.

ये भी पढ़ें: दिल्ली दंगा केस: उमर खालिद को कड़कड़डूमा कोर्ट से राहत

दूसरी तरफ, सीबीआई द्वारा भी इस मामले में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव सहित कुल 13 प्रमुख लोगों के खिलाफ अलग से चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जिस पर राऊज एवेन्यू कोर्ट संज्ञान लेकर लगातार सुनवाई कर रही है. अब पूरे देश की नजरें 31 जुलाई को आने वाले कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि लालू परिवार के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मुकदमा शुरू होगा या नहीं.

गोपाल कृष्ण

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