भारत में वैवाहिक दुष्कर्म की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई, जिसमें केंद्र और राज्यों के रुख पर फैसला होना है. (PC: भारत एक्सप्रेस)
Supreme Court: सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे और दोषी ठहराए गए जनप्रतिनिधियों पर आजीवन चुनाव लड़ने की रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ सुनवाई करेगी.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह तीन सदस्यीय बेंच का गठन करेगा. वही सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा के 776 सदस्यों में से 326 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें 210 गंभीर अपराधों से संबंधित है, जिनमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है.
वही 14 मुख्यमंत्रियों ने भी आपराधिक मामले घोषित किए है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार सांसदों और विधायकों के खिलाफ देशभर में करीब 4192 मामले लंबित चल रहे है. कुछ पूर्व सांसदों और विधायकों के केस लंबित है. रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले दर्ज है. इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 मामले और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के शिवकुमार, के खिलाफ 19, आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ 19 मामले दर्ज है.
मुकदमों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की निगरानी के बावजूद 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है. दाखिल रिपोर्ट के मुताबिक केरल के वी. डी सतीशन के खिलाफ 18 मामले, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ पांच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह के खिलाफ चार-चार मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है.
जबकि तमिलनाडु के सी. जोसेफ विजय के खिलाफ दो और बिहार के सम्राट चौधरी के खिलाफ दो मामले बताए गए हैं. इसके अलावा सिक्किम के पी. एस. तमांग, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, ओडिशा के मोहन चरण माझी और राजस्थान के भजनलाल शर्मा के खिलाफ एक-एक मामला दर्ज है. एमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया है कि इन मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल अदालत में मुकदमा चलाया जाए और आरोप लगाए जाने के एक साल के भीतर मामले की सुनवाई कर इसका निपटारा किया जाए. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति में अपराधीकरण को लेकर चिंता व्यक्त कर चुका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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