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प्रवर्तन निदेशालय के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, कहा- पुरानी जांच रिपोर्ट से नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की ओर से उठाए गए छह आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है. इनमें पांच मामलों की पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) जांच कर चुकी है.

मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई.

भारत में वैवाहिक दुष्कर्म की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई, जिसमें केंद्र और राज्यों के रुख पर फैसला होना है. (PC: भारत एक्सप्रेस)

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उठाए गए 6 आरोपो की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश दिया है. इनमें वे 5 मामले शामिल है, जिनकी पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा जांच कर चुकी हैं. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश दिया है.

अदालत ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि वह इस मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की पुरानी जांच रिपोर्ट से कोई प्रभाव नही पड़ेगा. दरअसल ईडी द्वारा बताए गए जिन छह आरोपों की बात हो रही है, उनमें से पांच मामलों की शुरुआती जांच ईओडब्ल्यू कर चुकी है. लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने पूरी कमान सीबीआई के साथ-साथ ईओडब्ल्यू को जल्द से जल्द नई स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान एजेंसी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल जनरल एस. वी राजू ने कोर्ट को बताया कि ईडी ने 6 आरोपों का जिक्र किया था और 5 पहलुओं की जांच ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है. एएसजी एसवी राजू ने कहा कि 1575 करोड़ रुपए के कथित लेन-देन से जुड़े छठे मुद्दे के संबंध में सीबीआई ने मुंबई की विशेष पीएमएलए कोर्ट में आगे की जांच की अनुमति मांगते हुए एक अर्जी दाखिल किया.

24 अगस्त से शुरू होगी याचिका पर सुनवाई

कोर्ट ने मुंबई के विशेष अदालत को निर्देश दिया कि वह 24 अगस्त को याचिका पर सुनवाई शुरू होने के बाद दो सप्ताह के भीत्तर सीबीआई के आगे की जांच के आवेदन पर फैसला करें. इससे पहले 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने आईएचएफएल से जुड़े संदिग्ध लेनदेन के आरोपों पर चुप्पी साधे रखने के लिए सीबीआई और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को फटकार लगाई थी.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि एजेंसियों ने अब तक न तो नियमित मामला दर्ज करने पर अंतिम फैसला लिया और न ही जांच की स्थिति बताने वाली रिपोर्ट अदालत में दाखिल किया था.

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भारत एक्सप्रेस



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