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सुप्रीम कोर्ट में TMC की दलीलें दरकिनार, मतगणना पर्यवेक्षकों पर लगी मुहर; SC बोली- नियमों के खिलाफ नहीं EC का फैसला

टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने टीएमसी की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें एडिशनल सीईओ द्वारा 13 अप्रैल को जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग द्वारा जारी सर्कुलर पर दखल देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि मतगणना के दौरान टीएमसी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का परिपत्र नियमों के विपरीत नहीं है.

कपिल सिब्बल की दलीलें खारिज

टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि आयोग द्वारा जारी सर्कुलर 20 अप्रैल को मिला है, जबकि आमतौर पर ऐसे मामलों में पहले से सूचना दी जाती है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले से ही केंद्रीय कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं, तो एडिशनल केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति क्यों की जा रही है.

सिब्बल ने कहा कि अनुच्छेद 324 का यह मतलब नहीं है कि चुनाव आयोग अपनी मर्जी से जैसे चाहे वैसे काम करे. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि राजनीतिक दलों से सहमति लेने का सवाल नहीं उठता है. कोर्ट ने कहा कि नियमों के तहत यह विकल्प खुला है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट केंद्र या राज्य सरकार, किसी के भी हो सकते हैं. इसलिए जब यह विकल्प मौजूद है, तो इस अधिसूचना को नियमों के खिलाफ नहीं माना जा सकता.

कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले की पुष्टि

दायर याचिका में कहा गया था कि चुनाव आयोग द्वारा उठाया गया यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है. इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में केंद्र सरकार और पीएसयू कर्मचारियों को मतगणना सुपरवाइजर और असिस्टेंट के रूप में नियुक्त करने के फैसले को वैध ठहराया था. हाई कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की नियुक्तियां चुनाव आयोग के विवेकाधिकार के दायरे में आती हैं और इन्हें अवैध नहीं कहा जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा था कि सिर्फ काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट ही काउंटिंग रूम में नहीं होंगे.

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कानूनी चुनौती का विकल्प खुला

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100 के तहत यदि बाद में यह साबित हो जाता है कि निर्वाचन आयोग के फैसले से अनुचित लाभ मिला, जिसके चलते टीएमसी उम्मीदवार की हार भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार से हुई, तो परिणाम को कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है. पार्टी ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी पर्यवेक्षक के रूप में शामिल करने की मांग की थी और चुनाव आयोग के इस विशेष फैसले को चुनौती दी थी.

गोपाल कृष्ण

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