Asian Games Trials 2026: सुप्रीम कोर्ट भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को लेकर डब्ल्यूएफआई की ओर से दायर याचिका पर 4 जून को सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए फोगाट को ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दिया था.
साथ ही जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने फोगाट को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा. हालांकि एशियन गेम्स ट्रायल्स के सेमीफाइनल में विनेश फोगाट को हार का सामना करना पड़ा.
विनेश फोगाट युवा रेसलर मीनाक्षी गोयत ने विमेंस 53 भारवर्ग के मुकाबले में 6-4 से हरा दिया. इस हार के साथ ही फोगाट का एशियन गेम्स 2026 में जगह बनाने का सपना टूट गया है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि यह बेहद चिंताजनक है. यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट की खुली अदालत में नहीं सुनाया गया. उन्होंने कहा था कि हाई कोर्ट के फैसलों पर गौर कीजिए.
वही फोगाट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने कहा था कि मैं सिर्फ भाग लेना चाहती हूं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आप निश्चित रूप से कोई साधारण एथलीट नहीं है. लेकिन 14 दिसंबर 3034 को आपने अवकाश लिया और कहा कि आप अगस्त 2025 से भाग लेना शुरू करेगी.
तीन जून 2025 को आपने बताया कि अवकाश समाप्त हो गया है और आप भाग लेना शुरू करेगी. इसके बाद जुलाई 2025 में आप मां बन गई. पात्रता आईटीए पत्र से शुरू होती है. उन्होंने तीन जुलाई को पत्र लिखकर कहा कि आप 1 जनवरी 2026 से पात्र होंगी. यह थोड़ा चिंताजनक है.
हालांकि जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा था कि हम नोटिस जारी कर रहे है. जस्टिस आराधे ने पूछा था कि क्या आप पात्रता नीति के अन्तर्गर्त पात्र है? दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारतीय कुश्ती महासंघ में याचिका दायर किया है. दिल्ली हाई कोर्ट 22 मई को दिए अपने आदेश में विनेश फोगाट को एशियाई खेल 2026 के सिलेक्शन ट्रायल्स में शामिल होने की इजाजत दी थी.
अदालत ने इस दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ की तीखी आलोचना करते हुए कहा था कि फोगाट के खिलाफ महासंघ के रवैया बदले की भावना से प्रेरित प्रतीत होता है और उसके बयान पिछ्ली सोच को दर्शाते हैं.
मुख्य न्यायाधीश डी. के उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि 30 और 31 मई 2026 को होने वाले चयन ट्रायल में विनेश फोगाट को भाग लेने दिया जाए. अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि ट्रायल की वीडियों रिकॉर्डिंग कराई जाए और उसमें भारतीय खेल प्राधिकरण तथा भारतीय ओलंपिक संघ ने स्वतंत्र पर्यवेक्षक मौजूद रहें.
डब्ल्यूएफआई के नए मानदंडों के अनुसार ट्रायल्स के लिए केवल उन्हीं पहलवानों को पात्र माना गया था, जिन्होंने 2025 और 2026 की हालिया घरेलू प्रतियोगिताओ में पदक जीते थे, जबकि पुराने शानदार प्रदर्शनों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया था.
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भारत एक्सप्रेस
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