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छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला: ड्राइवर नारायण साहू की जमानत पर जुलाई में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

Suryakant Tiwari Driver Bail: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 540 करोड़ रुपये के कोयला घोटाला मामले में आरोपी नारायण साहू की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जुलाई में सुनवाई करेगा. हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के इस कथित ‘कैश हैंडलर’ ड्राइवर ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है.

SUPREME COURT
Edited by Shubhra Rai
Suryakant Tiwari Driver Bail: सुप्रीम कोर्ट छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाला मामले में आरोपी नारायण साहू की ओर से दायर याचिका पर जुलाई में सुनवाई करेगा. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की अवकाशकालीन पीठ ने नारायण साहू की ओर से दायर जमानत जमानत याचिका को जुलाई में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है.
इस मामले में मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर है नारायण साहू. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इसे जमानत देने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि आर्थिक सामान्य अपराधों से कही अधिक गंभीर होते हैं, क्योंकि इनका सीधा असर देश की आर्थिक व्यवस्था और जनता के विश्वास पर पड़ता है.

नेताओं और अधिकारियों तक पैसा पहुचाने का आरोप

एसीबी-ईओडब्ल्यू के मुताबिक नारायण साहू केवल ड्राइवर की भूमिका में नहीं था, बल्कि इस सिंडिकेट में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. जांच एजेंसी के मुताबिक वह सूर्यकांत तिवारी का भरोसेमंद सहयोगी था और अवैध वसूली से प्राप्त नकदी के संग्रह और वितरण का काम संभालता था. उसपर लगभग 13 करोड़ रुपए की नकदी एकत्र करने और करीब 7.5 करोड़ रुपए विभिन्न प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों तक पैसा पहुचाने का आरोप है.

उसके खिलाफ वारंट भी जारी

आयकर विभाग द्वारा जब्त दस्तवेज़ों और डायरियों में भी नारायण साहू से जुड़े कई नकद लेन-देन का उल्लेख मिला है, जिसे जांच एजेंसियों उसके सक्रिय जुड़ाव का महत्वपूर्ण साक्ष्य मान रही हैं. बताया गया है कि वह पिछले दो वर्षों से फरार है और उसके खिलाफ वारंट भी जारी हो चुका है. साहू की ओर से पेश हाई कोर्ट में दलील देते हुए कहा था कि वह केवल ड्राइवर है, एफआईआर में उसका नाम नहीं है और अन्य आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है.

हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया

लेकिन हाई कोर्ट ने इनकी दलीलों को खारिज करते हुए याचिका को खारिज कर दिया था. यह मामला रायगढ़, कोरबा और सूरजपुर जिलों में कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से कथित रूप से प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली से जुड़ा है. इस मामले की जांच ईडी भी कर रही है. ईडी की जांच में आरोप है कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच इस नेटवर्क ने लगभग 540 करोड़ रुपए की अवैध लेवी वसूली थी. मामले में अभी भी जांच चल रही है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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