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Dhar Bhojshala

 Dhar Bhojshala Dispute and History: भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर घोषित करते हुए एक बार फिर यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है. इस कड़ी में आपको भोजशाला के इतिहास और विवाद के बारें में विस्तार से बताते हैं.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार के चर्चित भोजशाला विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूरे परिसर को मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर घोषित किया है. अदालत ने ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में मिले सनातन प्रतीकों को आधार मानते हुए हिंदू पक्ष के हक में फैसला दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वीडियोग्राफी और सर्वेक्षण से जुड़ी आपत्तियों पर अंतिम निर्णय मध्य प्रदेश हाई कोर्ट करेगा.

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला (Bhojshala) में बसंत पंचमी पर खास माहौल है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हिंदू पक्ष सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा कर रहा है, जबकि मुस्लिम समाज को दोपहर 1 से 3 बजे नमाज की अनुमति मिली है.

सुप्रीम कोर्ट ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला में बसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ होने पर बड़ा आदेश दिया है. सीजेआई की पीठ ने निर्देश दिया है कि परिसर में नमाज और सरस्वती पूजा दोनों आयोजित किए जाएंगे

Dhar Bhojshala: याचिका में कहा गया है कि एएसआई के वैज्ञानिक सर्वे में भी बहुत सी मूर्तिया निकली हैं वह भी जैन धर्म से संबंधित है. भोजशाला एक जैन गुरुकुल था. इसमें सभी धर्म के बच्चे पढ़ने आते थे.

Dhar Bhojshala: याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 अप्रैल के दिए गए आदेश को वापस लेने की मांग की गई है.

Dhar Bhojshala Survey: मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई पर में रोक लगाने की मांग की है.

सर्वे के दौरान सीढ़ियों के नीचे एक बंद कमरा मिला है, जिसमें मूर्तियों के अलावा शंख-चक्र, शिखर समेत करीब 79 अवशेष भी मिले हैं.