लीगल

राहुल गांधी के ‘मार्च’ पर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों में रोष: SCBA को सौंपा ज्ञापन, अदालती प्रक्रिया पर राजनीतिक दबाव बनाने की निंदा का प्रस्ताव लाने की मांग

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के दौरान राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और समर्थकों के जमावड़े को लेकर कानूनी बिरादरी में गहरा असंतोष सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के 190 से अधिक अधिवक्ताओं ने एक संयुक्त प्रतिवेदन (Representation) देकर मांग की है कि बार एसोसिएशन एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर इस तरह के राजनीतिक मार्च और न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने के प्रयासों की कड़ी निंदा करे.

यह पूरा विवाद 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में निर्वाचन आयोग के खिलाफ दायर याचिका (डायरी संख्या: 64196/2026, ‘राहुल गांधी बनाम भारतीय निर्वाचन आयोग’) के दौरान निकाले गए मार्च से जुड़ा है. वकीलों का आरोप है कि याचिका दायर करने के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकत्र कर न्यायालय परिसर की ओर मार्च निकाला गया, जो न्यायिक गरिमा के सर्वथा विपरीत है.

‘अदालत राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का अखाड़ा नहीं’

एससीबीए के मानद सचिव और कार्यकारी समिति के सदस्यों को 13 अक्टूबर 2026 को सौंपे गए ज्ञापन में वकीलों ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का पूर्ण अधिकार है. हालांकि, इस अधिकार का प्रयोग न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संस्थागत शुचिता और गरिमा को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए.

अधिवक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश की शीर्ष संवैधानिक अदालत और न्याय का मंच है, न कि राजनीतिक प्रभाव, आर्थिक ताकत या भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन करने का स्थान. याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी तरह विधिक नियमों, संवैधानिक सिद्धांतों और मामले के गुण-दोष पर आधारित होनी चाहिए.

‘छात्र संघ के नामांकन जैसा न बने अदालती तरीका’

प्रतिवेदन में यह गंभीर चिंता जताई गई कि यदि इस तरह की प्रथाओं को रोका नहीं गया, तो भविष्य में प्रभावशाली पक्षकार अपने पक्ष में दबाव बनाने के लिए वाहनों के काफिले और हजारों समर्थकों के साथ अदालतों में पहुंचने लगेंगे. शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल करने का रूप किसी छात्र संघ या राजनीतिक चुनाव के नामांकन जुलूस जैसा नहीं होना चाहिए. वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की कार्यशैली की शुरुआत में ही भर्त्सना नहीं की गई, तो यह प्रवृत्ति उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों तक फैल सकती है, जिससे न्यायिक कार्यवाही और न्यायाधीशों की निष्पक्षता प्रभावित होने का जोखिम रहेगा.

संवैधानिक समानता और रूल ऑफ लॉ का हवाला

ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा गया कि कानून के समक्ष सभी नागरिक समान हैं. कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी राजनीतिक पद, सार्वजनिक कद या वित्तीय संसाधनों से संपन्न हो, संविधान और कानून से ऊपर नहीं हो सकता. वकीलों ने बार एसोसिएशन से आग्रह किया कि संस्थागत निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए बिना किसी दलगत भेदभाव के इस विषय पर स्पष्ट संदेश दिया जाए, ताकि न्याय के मंदिर में ‘भीड़तंत्र’ की कोई गुंजाइश न रहे.

यह भी पढ़िए: पीएम मोदी के आवास पर हरियाणा के मंत्रियों और विधायकों की बैठक, ‘विकसित भारत 2047’ के विजन पर हुआ मंथन

Bharat Express Desk

Recent Posts

दिवाली से पहले शेयर बाजार में धमाका: 4 दिन में सेंसेक्स 3500 अंक उछला, निवेशकों ने कमाए 14 लाख करोड़ रुपये

दिवाली से पहले शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. 28 अक्टूबर के…

10 minutes ago

500 साल के संघर्ष से आया ये दिन, अयोध्या के विकास पर क्या बोले सीएम योगी?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत में ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ की स्मृति में आयोजित श्रीराम…

24 minutes ago

Dhanteras 2026 Special: धन का धर्म और मर्म- धन्वन्तरि, लक्ष्मी-नारायण और कुबेर की कथाओं से समझें क्या है असली समृद्धि

Dhanteras 2026: धन का धर्म और मर्म. धनतेरस पर भगवान धन्वन्तरि, श्री लक्ष्मी-विष्णु और कुबेर…

24 minutes ago

प्रलय का पराक्रम: DRDO की मिसाइल ने बदला रास्ता, दुश्मन के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

DRDO Pralay Missile: भारत ने ओडिशा के चांदीपुर में DRDO द्वारा विकसित प्रलय मिसाइल का…

27 minutes ago

सीएम योगी का 1.89 करोड़ परिवारों को दिवाली तोहफा, विपक्ष पर तीखा हमला

CM Yogi Adityanath Diwali Gift: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली के पावन अवसर पर प्रदेश…

49 minutes ago

‘राहुल ही देश के हीरो, मुझे सर्टिफिकेट नहीं चाहिए’, अखिलेश के ‘ना’ पर स्वामी का जवाब

UP Assembly Election 2027: स्वामी प्रसाद मौर्य ने INDIA गठबंधन में शामिल होने के सवाल…

54 minutes ago