सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अरविंद पी दातार को ईडी द्वारा जारी समन पर नाराजगी जताई है. हालाकिं ईडी ने समन को वापस ले लिया है. कथित तौर पर यह समन दातार द्वारा एक क्लाइंट, केयर हेल्थ इंश्योरेंस की दी गई कानूनी राय से जुडा था, जो रेलिगेयर इंटरप्राइजेज की पूर्व चेयरमैन रश्मि सलूजा को जारी किए गए ईएसओपी के बारे में था.
SCAORA ने ईडी की कार्रवाई की कड़ी अस्वीकृति और स्पष्ट निंदा करते हुए कहा कि यह अत्यधिक अनुचित है और कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को खतरा पहुंचाता है. ईडी की यह कार्रवाई न केवल अनुचित है, बल्कि जांच के दायरे से बाहर निकलने की एक परेशान करने वाली प्रवृति को दर्शाती हैं, जो कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को खतरे में डालती है. कानून के शासन की नींव को कमजोर करती है. जब जांच एजेंसियों केवल कानूनी राय देने के लिए अधिवक्ताओं के खिलाफ बलपूर्वक उपाय करती हैं, तो वे केवल व्यक्तियों को ही निशाना नहीं बनाती है.
एसोसिएशन ने इस कदम को जांच के दायरे से बाहर निकलने की परेशान करने वाली प्रवृति का हिस्सा बताया जो अंततः कानून के शासन को नुकसान पहुचा सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि कानूनी पेशेवरों के खिलाफ बलपूर्वक कारवाई पूरे कानूनी समुदाय पर एक भयावह प्रभाव साल सकती है.
SCAORA ने यह भी कहा कि वकीलों की पेशेवर स्वतंत्रता को कमजोर करना अंततः न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ही खतरे डालता है., क्योंकि दोनों एक साथ खड़े होते हैं या गिरते है. SCAORA ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार माना है कि वकील अपने मुवक्किलों के कृत्यों के लिए सिर्फ इसलिए जवाबदेह नहीं हैं क्योंकि उन्होंने कानूनी सलाह दी है.
SCAORA ने यह भी कहा है कि ईडी का कदम गलत तरीके से कानूनी राय देने को आपराधिक संलिप्तता के बराबर मानता है, जो अनुचित और संवैधानिक रूप से अस्थिर प्रस्ताव है.
-भारत एक्सप्रेस