सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट में सीघे अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने पर नाराजगी जताई है. अदालत ने कहा कि निचली अदालत को नजरअंदाज कर सीघे हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करना सही नहीं है.
कोर्ट ने कहा कि इस पर विचार करने का अब समय आ गया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में सेशन कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों को अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार दिया गया है.
लेकिन इसका मतलब यह नही है कि हर मामले को हाई कोर्ट में दाखिल किया जाए. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ऐसे मामलों को सीधे सुने. कोर्ट ने इस मामले में सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. सिद्धार्थ लूथरा अधिवक्ता जी. अरुध्रा राव को सहयोग करेंगे.
बता दें कि यह मामला केरल है. याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट जाए बिना सीधे केरल हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी. वर्ष 2003 में केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा था कि सेशन कोर्ट में पहले जाना जरूरी नहीं हैं.
वही 2020 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पांच सदस्यीय बेंच ने भी अपने फैसले में कहा था कि आरोपी विशेष परिस्थिति में सीधे हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि क्या सेशन कोर्ट जाए बिना सीघे हाई कोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है या नही.
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-भारत एक्सप्रेस
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