लीगल

राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर व 1 किलोमीटर के दायरे में खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के सारंडा वन्यजीव अभ्यारण्य मामले में बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर और ऐसे राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभ्यारण्य से एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोक लगा दिया है.

सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह फैसला दिया हैं. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गोवा के संबंध में खनन पर ऐसा प्रतिबंध लगाया गया. फिर भी इस प्रतिबंध को पूरे देश में लागू करने की जरूरत हूं. साथ ही कोर्ट 3 जून 2022 को दिए गए अपने निर्देश में संशोधन कर दिया है.

खदानें आवंटित, पर चालू नहीं

पिछली सुनवाई के दौरान स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि कुछ खदानें आवंटित हैं पर अभी चालू नहीं हुई.

इसपर सीजेआई ने कहा था कि हम उन 126 खनन प्रभाग के भीतर किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि की अनुमति नहीं देंगे. वहीं झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आपत्ति जाहिर करते हुए कहा था कि झारखंड का 38 फीसदी क्षेत्र वन है और राज्य इसके संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है.

जबकि मामले में एमिकस क्यूरी परमेश्वर ने आरोप लगाया था कि निजी खनन कंपनियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संरक्षित वन क्षेत्र के लिए प्रस्तावित क्षेत्रफल को 31, 468.25 हेक्टेयर से घटाकर लगभग 24 000 हेक्टेयर करने की मांग की जा रही है.

मुख्य सचिव के खिलाफ शुरू हो सकती है कार्यवाही

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सारंडा को अभ्यारण्य घोषित न करने को अवमानना माना था और कहा था कि यदि आठ अक्टूबर तक अभ्यारण्य घोषित नहीं किया गया तो मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू होगी.

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट को सूचित किया था कि उसने प्रस्तावित अभ्यारण्य क्षेत्र को पहले के 31468.25 हेक्टेयर से बढ़ाकर 57510.41 हेक्टेयर कर दिया गया है और अतिरिक्त 13603.806 हेक्टेयर क्षेत्र को सासंगदाबुरू संरक्षण रिजर्व के रूप में अधिसूचित करने के लिए चिन्हित किया है. अदालत ने कहा कि प्रस्ताव पहले ही विशेषज्ञ टिप्पणियों के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भेज दिया है.

आदिवासियों के जीवन में नकारात्मक प्रभाव

बता दें कि कोर्ट ने आदेश के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने हाल ही में सारंडा का दौरा किया था, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों की स्थिति का मूल्यांकन किया.

इस ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट का उल्लेख किया हैं कि सारंडा को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित करने से वहां के गरीब आदिवासियों के जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. बता दें कि सारंडा अभ्यारण्य के संबंध में वर्ष 2022 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अभ्यारण्य घोषित करने का आदेश दिया था.

ये भी पढ़ें: फांसी घर मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को फिलहाल नही मिली राहत

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

सुबह-सुबह हिली पहाड़ों की धरती…! हिमाचल में 4.1 तीव्रता का भूकंप, मची अफरा-तफरी

हिमाचल प्रदेश के शिमला में 17 अक्टूबर 2026 की सुबह 4.1 तीव्रता का भूकंप आया.…

44 minutes ago

Aaj Ka Panchang 17 October 2026: आज का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और मां कालरात्रि की पूजा का समय

Aaj Ka Panchang 17 October 2026: आज 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को शारदीय नवरात्रि के…

1 hour ago

धनु राशि वालों के लिए आज का दिन खास, करियर में चमकेगी प्रतिभा; जानें लव लाइफ और सेहत का हाल

Aaj Ka Rashifal Dhanu Rashi: धनु राशि वालों के लिए आज का दिन उत्साह और ऊर्जा…

1 hour ago