दिल्ली हाई कोर्ट फांसी घर मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को फिलहाल राहत नही मिली है. कोर्ट दायर याचिका पर 24 नवंबर को सुनवाई करेगा. जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच मामले में सुनवाई कर रही हैं. केजरीवाल और सिसोदिया ने दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति की ओर से फांसी घर के रिनोवेशन में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामले में जारी किए गए समन को चुनौती दी हैं.
दिल्ली विधानसभा परिसर में एक संरचना को लेकर विवाद बना है. आम आदमी पार्टी का आरोप है कि एक संरचना को ब्रिटिश कालीन फांसी घर बताकर 2022 में केजरीवाल की मौजूदगी में उद्धघाटन किया गया था. बीजेपी सरकार ने इस दावे को झूठा बताते हुए कहा है कि यह मूलरूप से सेवा सीढ़ी या टिफिन रूम था. लेकिन केजरीवाल और सिसोदिया सहित अन्य आप नेताओं ने इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश किया और सार्वजनिक धन का भी दुरुपयोग किया.
फांसी घर विवाद में राजनीतिक टकराव
दिल्ली विधानसभा ने आप के वरिष्ठ नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, रामनिवास गोयल और राखी बिड़ला को तलब किया है और उन्हें पिछली आप सरकार के फांसी घर संबंधी दावों की जांच कर रही समिति के समक्ष 13 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है. केजरीवाल सहित अन्य ने समन को चुनौती देने वाली याचिका में कहा है कि फांसी घर के उद्घाटन के तीन साल से अधिक समय बाद और सातवी विधानसभा के भंग होने के कई महीनों बाद, पांच अगस्त को दिल्ली की आठवीं विधानसभा में पहली बार इस ढांचे की प्रमाणिकता से संबंधित मुद्दा उठाया गया था.
2021 में तत्कालीन स्पीकर आर. एन गोयल ने कहा था कि2016 में एक सुरंग की खोज के बाद विधानसभा परिसर में एक फांसी घर का पता चला था. उन्होंने दावा किया था कि लाल किले में बंद कैदियों को फांसी देने के लिए इसी कमरे में ले जाया जाता था.
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-भारत एक्सप्रेस
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