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ऑपरेशन सिंदूर पोस्ट विवाद में प्रोफेसर महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत बरकरार, SIT जांच पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

Legal News: सुप्रीम कोर्ट ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित पोस्ट करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर मोहम्मद अमीर अजमद अली खान महमूदाबाद को मिली अंतरिम राहत को बरकरार रखा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने SIT को फटकार लगाते हुए जांच को दो एफआईआर तक ही सीमित रखने का आदेश दिया है. कोर्ट ने एसआईटी को चार सप्ताह में जांच पूरी करने का आदेश दिया है.

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आपको प्रोफेसर की जरूरत नहीं है, आपको डिक्शनरी की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि एसआईटी को अब महमूदाबाद को दोबारा पूछताछ के लिए तलब करने की आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने एसआईटी को याद दिलाया कि उसे सिर्फ पोस्ट की भाषा और अभिव्यक्ति में अपराध के पहलुओं की जांच करनी है, न कि व्यापक जांच करनी.

जब्त गैजेट्स पर नाराजगी कोर्ट ने जताई नाराजगी

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि SIT ने उनका लैपटॉप और दूसरे गैजेट जब्त किए हैं, जिसपर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इस केस से संबंधित कोई पोस्ट या टिप्पणी नही कर सकते है. कोर्ट ने कहा कि एसआईटी जांच को किसी और दिशा में ले जाकर खुद को क्यों भटका रही है?

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने हरियाणा के डीजीपी को जांच के लिए एक तीन सदस्यीय SIT के गठन का आदेश दिया था. कोर्ट ने DGP से 24 घंटे के भीतर SIT के गठन का आदेश दिया था. जिसमें तीन IPS अधिकारी शामिल होंगे. जो हरियाणा या दिल्ली से न हो. कोर्ट ने यह भी कहा था कि एसआईटी में एक महिला अधिकारी को शामिल किया जाए.

कोर्ट ने कहा था कि दो कथित आपत्तिजनक पोस्ट की सामग्री को देखते हुए जांच पर रोक लगाने की आवश्यकता नही है. एक निजी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को भाजपा युवा मोर्चा के एक नेता की शिकायत पर दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया गया था. अली के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं. एक जठेड़ी गांव के सरपंच एवं भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य योगेश जठेड़ी ने राई थाने में दर्ज कराई है. जबकि दूसरी राज्य महिला आयोग की तरफ से डीजीपी को शिकायत दी गई थी.

महमूदाबाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की थी मांग

राज्य महिला आयोग ने मध्य प्रदेश में एक मंत्री के खिलाफ हाई कोर्ट के टिप्पणी का हवाला देकर महमूदाबाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी. महिला आयोग ने अली खान द्वारा की गई टिप्पणी को स्वतः संज्ञान लेते हुए सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर को 48 घंटे में दफ्तर में पेश होने को कहा था. महमूदाबाद ने दोनों सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ सेना के नियमों पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

अली खान ने सोशल मीडिया पर ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित टिप्पणी करते हुए महिला सैन्य अधिकारियों कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की भूमिका को नकरात्मक रूप से प्रस्तुत किया. राज्य महिला आयोग का कहना था कि उनके बयानों में नरसंहार, अमानवीयता और पाखंड जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए भारतीय सेना एवं सरकार की मंशा पर साम्प्रदायिक दुर्भावना से प्रेरित आरोप लगाए गए.

ये भी पढ़ें: भारत के पास ‘स्टेबलकॉइन्स’ फिनटेक क्षेत्र में नेतृत्व करने का मौका- प्रदीप भंडारी

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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