सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के एक जाट परिवार द्वारा परीक्षा से पहले बौद्ध धर्म अपनाकर अल्पसंख्यक कोटे का लाभ लेने पर आपत्ति जताई है. सीजेआई सूर्यकांत ने इसे एक तरह की नई धोखाधड़ी करार दिया है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह धोखाधड़ी का नया तरीका है. यही कहते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हरियाणा के मुख्य सचिव से दो सप्ताह में जवाब मांगा है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील से सीजेआई ने पूछा कि आप पुनिया है?, आप किस अल्पसंख्यक वर्ग से हैं? मैं आपसे सीधे-सीधे पूछता हूं. आप किस प्रकार के पुनिया हैं? वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल जाट पुनिया हैं.
इसपर सीजेआई ने पूछा की आप कैसे अल्पसंख्यक हैं? वकील ने कहा कि मैंने बौद्ध धर्म अपना लिया है. यह मेरा अधिकार है.
सीजेआई ने कहा कि वाह, यह तो धोखाधड़ी का नया तरीका है. सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव से रिपोर्ट देने को कहा है, जिसमें अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के लिए क्या दिशा निर्देश हैं? क्या यह स्वीकार्य है कि एक उच्च वर्ग का सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार, जो समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से ऊपर है. विशेषकर तब जब उन्होंने पिछले आवेदन में खुद को सामान्य वर्ग का घोषित किया था और खुद को बौद्ध अल्पसंख्यक घोषित कर दिया.
यह याचिका नितिन पुनिया और एकता पुनिया की ओर से दायर किया गया था. दोनों हरियाणा के हिसार जिले के जाट परिवार से आते हैं और जन्म से सामान्य श्रेणी में आते हैं. याचिकाकर्ता का दावा था कि उन्होंने बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे के तहत उत्तर प्रदेश स्थित सुभारती मेडिकल कॉलेज में Neet-PG पाठ्यक्रम में प्रवेश में दाखिला नहीं हो सका. याचिकाकर्ता ने हिसार के उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) द्वारा जारी बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र के आधार पर प्रवेश लिया था.
हालांकि यूपी सरकार की 2016 की अधिसूचना के अनुसार अल्पसंख्यक संस्थानों को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की मान्यता के साथ-साथ राज्य सरकार से भी मान्यता लेनी होती है. लेकिन यूपी सरकार ने ऐसी मान्यता देने से इनकार कर दिया था.
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि परीक्षा से पहले बौद्ध बन गए? कोर्ट ने जिला प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए और पूछा कि एसडीओ हिसार ने ऐसे प्रमाणपत्र कैसे जारी कर दिए? अदालत ने रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि उम्मीदवारों ने आवेदन के समय स्वयं को सामान्य श्रेणी का बताया था और जन्म से.वे सामान्य श्रेणी के ही है.
कोर्ट ने इसे भी रिकॉर्ड पर लिया कि प्रमाणपत्र उस समय जारी किए गए जब उम्मीदवार नीट 2025 में शामिल हो रहे थे, जबकि वे न तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से थे और न ही परंपरागत रूप से किसी अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित है.
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-भारत एक्सप्रेस
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