(सुप्रीम कोर्ट)
मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) की लगातार हो रही नाकेबंदी (ब्लॉकेड) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने कड़ा रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने ‘कुकी वीमेंस ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स’ (Kuki Women’s Organisation for Human Rights) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मणिपुर राज्य सरकार को आधिकारिक नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है.
कुकी महिला संगठन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि मणिपुर के कांगपोकपी (Kangpokpi) जिले में, जहाँ मुख्य रूप से कुकी समुदाय के लोग रहते हैं, एक स्थानीय नागा समूह ने नेशनल हाईवे को पूरी तरह से ब्लॉक (अवरुद्ध) कर रखा है.
इस पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि बंद पड़े सभी राजमार्गों को दोबारा सुचारू रूप से कैसे चालू किया जा सकता है. अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वह राज्य भर में बंद पड़े अन्य सभी राजकीय व राष्ट्रीय राजमार्गों की पूरी जानकारी और वर्तमान स्थिति का ब्योरा कोर्ट के समक्ष पेश करे. सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा
“राजमार्ग (हाईवे) आम नागरिकों के दैनिक जीवन की जीवन रेखा (लाइफलाइन) होते हैं. इन्हें ब्लॉक करने से किसी भी पक्ष या समुदाय का भला नहीं हो सकता. इस गंभीर मानवीय और प्रशासनिक समस्या को टुकड़ों में नहीं निपटाया जा सकता, बल्कि इसका एक समग्र और स्थायी समाधान निकालना होगा.”
मामले की सुनवाई के दौरान मैतेई (Meitei) समुदाय के संगठन की ओर से पेश हुए वकील ने कुकी वीमेंस ऑर्गनाइजेशन की याचिका का कड़ा विरोध किया. मैतेई संगठन के वकील ने अदालत के सामने आरोप लगाया कि खुद कुकी समुदाय वर्ष 2023 से मणिपुर के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों को ब्लॉक करने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोकने के लिए जिम्मेदार रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि केवल एक पक्ष पर दोष मढ़ना पूरी तरह अनुचित है क्योंकि सड़कों की नाकेबंदी से पूरा राज्य प्रभावित है.
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इससे पहले हुई पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत के समक्ष राज्य में महिलाओं के खिलाफ हुई बर्बर हिंसा का मुद्दा उठाया था. उन्होंने इसे कुकी समुदाय की महिलाओं पर ‘लक्षित हमला’ (Targeted Attack) करार दिया था. वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट को अवगत कराया था कि:
राजधानी इंफाल में कार धो रही दो महिलाओं पर उग्र भीड़ ने अमानवीय अत्याचार किया और उनकी नृशंस हत्या कर दी. पीड़ितों का पूरा परिवार बेघर होकर राहत शिविरों (Relief Camps) में रहने को मजबूर है. इसके अलावा एक 18 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वीभत्स घटना को अंजाम दिया गया.
वृंदा ग्रोवर ने दलील दी थी कि हालांकि दोनों समुदायों के बीच हिंसा हो सकती है, लेकिन अल्पसंख्यक कुकी समुदाय की महिलाओं को विशेष रूप से निशाना बनाकर लक्षित हमले किए जा रहे हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर सभी बंद हाईवे को खोलने की ठोस कार्ययोजना मांगी है.
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