samay raina show
दिव्यांगजनों (दिव्यांग समुदाय) पर स्टैंड-अप कॉमेडी के दौरान आपत्तिजनक और असंवेदनशील मजाक करने के मामले में घिरे मशहूर कॉमेडियन समय रैना, सोनाली ठक्कर, मुकुल गोयल, बलराज घई और निशांत तंवर को सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) से बड़ी कानूनी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी कंटेंट क्रिएटर्स और स्टैंड-अप कॉमेडियन्स के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्राथमिकियों (FIR) को पूरी तरह से रद्द (Quash) कर दिया है.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सभी संबंधित कलाकारों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए सभी सुधारात्मक निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन किया है. पीठ ने कहा कि
“इन कलाकारों ने समाज में दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता व जागरूकता फैलाने वाले विशेष कार्यक्रम आयोजित किए और उनके कल्याण के लिए आवश्यक फंड भी जुटाए हैं. सुधारात्मक कदमों और निर्देशों के पूर्ण अनुपालन को देखते हुए इनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाता है.”
मामले की पिछली सुनवाई का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने याद दिलाया कि शीर्ष अदालत ने मुख्य आरोपी समय रैना पर ₹3 लाख का जुर्माना लगाया था. इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना को निर्देश दिया था कि वे दिव्यांग व्यक्तियों के कल्याण, सम्मान बढ़ाने और सामाजिक जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रति माह कम से कम दो विशेष चैरिटी/जागरूकता शो आयोजित करेंगे. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह समय रैना और बाकी सभी कंटेंट क्रिएटर्स का नैतिक दायित्व है कि वे दिव्यांग व्यक्तियों को पूरे सम्मान के साथ अपने कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए राजी करें.
यह पूरा मामला एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका से शुरू हुआ था. याचिकाकर्ता एनजीओ ने आरोप लगाया था कि समय रैना ने अपने एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नामक गंभीर दुर्लभ बीमारी से पीड़ित एक नेत्रहीन नवजात बच्चे का असंवेदनशील मजाक उड़ाया था.
सुनवाई के दौरान एनजीओ के वकील ने कोर्ट को बताया था कि कैसे समय रैना ने शो में महज 2 महीने के मासूम बच्चे की बीमारी का उपहास उड़ाया था. समय रैना ने कहा था कि उस बच्चे के इलाज के लिए ₹16 करोड़ का एक विशेष इंजेक्शन चाहिए, और आगे तंज कसते हुए टिप्पणी की थी कि “पता नहीं इतना महंगा इंजेक्शन देने के बाद भी वह बच पाएगा या नहीं.” इस अभद्र और असंवेदनशील टिप्पणी के सार्वजनिक होने के बाद देश भर में भारी आक्रोश फैल गया था और पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई थी.
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पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करते हुए अवगत कराया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल स्पेस पर अश्लील, अपमानजनक और असंवेदनशील कंटेंट पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए सरकार जल्द ही एक नया व सख्त वैधानिक कानून लाने जा रही है. फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सभी शर्तों, फंड जुटाने और जागरूकता कार्यक्रमों के सफल आयोजन के बाद शीर्ष अदालत ने इस आपराधिक विवाद को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है.
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