सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी में लखनऊ जोन के आईपीएस अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसबी शिराडकर, सीबीसीआईडी के महानिरीक्षक मोदक राजेश डी राव और यूपी स्पेशल रेंज सुरक्षा बटालियन के कमांडेंट हेमंत कुटियाल शामिल है. सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से दो महीने में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट देने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि अवैध रूप से कुछ भू स्वामियों को भारी मात्रा में मुआवजा दिया गया, जबकि वह इतने मुआवजे के हकदार नहीं थे.
उत्तर प्रदेश सरकार से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस मामले की जांच के लिए गठित समिति के कामकाज से भी असंतुष्टि जाहिर किया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी अन्य बातों के अलावा इस मुद्दे पर भी गौर करेगा कि क्या भूमि मालिकों को भुगतान की गई मुआवजे की मात्रा समय-समय पर अदालतों द्वारा पारित निर्णयों के संदर्भ में उनके हकदार से अधिक थी, यदि हां, तो इतने अधिक भुगतान के लिए कौन अधिकारी/कर्मचारियों के बीच कोई मिलीभगत थी और क्या नोएडा की समग्र कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का आभाव है.
हालांकि कोर्ट ने अतिरिक्त मुआवजा पाने वाले लाभार्थियों, किसानों और भूस्वामियों को बिना उसकी अनुमति के किसभी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया. कोर्ट ने यह भी कहा इसलिए यह वांछित है कि एक स्वतंत्र एजेंसी को वैधानिक प्राधिकरण के रूप में नोएडा के कामकाज की गहन जांच करनी चाहिए. उत्तर प्रदेश सरकार ने पांच अक्टूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि उसके मेरठ जोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सहित तीन अधिकारियों की एक समिति गठित की है. 14 सितंबर 2023 को जब मामले की सुनवाई हुई, तो पता चला कि मामले में दर्ज एफआईआर जमीन मालिकों को कथित तौर पर अधिक मुआवजे के भुगतान का एक मात्र मामला नही है, बल्कि ऐसे कई मामले है, जिनमें प्रथम दृष्टया, बाहरी विचारों और लेन-देन के आधार पर भुगतान किया गया.
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-भारत एक्सप्रेस