आईआरसीटीसी (IRCTC) होटल टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के बहुचर्चित मामले में दिल्ली की विशेष राऊज एवेन्यू अदालत अब आगामी 27 अगस्त 2026 को आरोप तय करने (Framing of Charges) पर अपना फैसला सुनाएगी. कोर्ट ने फैसला पूरी तरह तैयार न हो पाने के चलते इसे आगे के लिए टाल दिया है.
राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (Special Judge) डॉ. विशाल गोगने की अदालत ने सभी पक्षों की विस्तृत कानूनी जिरह और बहस पूरी होने के बाद चार्ज फ्रेम करने पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सहित कुल 16 आरोपी शामिल हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव के पूरे परिवार को मुख्य रूप से नामजद किया गया है, जिनमें:
सहित अन्य करीबी व्यक्तियों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है. अदालत ने पूर्व की सुनवाई में यह भी माना था कि कथित होटल टेंडर घोटाले की पूरी आपराधिक साजिश तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की सीधी जानकारी में रची गई थी. अदालत के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में अनुचित प्रशासनिक हस्तक्षेप करने और भारी आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया बेहद गंभीर हैं.
उल्लेखनीय है कि इसी मामले से जुड़े केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के मूल आपराधिक केस में लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही औपचारिक आरोप तय किए जा चुके हैं और उसका ट्रायल नियमित रूप से चल रहा है.
सीबीआई मामले में जिन प्रमुख कानूनी धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
इस मामले में अन्य प्रमुख आरोपियों में आईआरसीटीसी के पूर्व ग्रुप जनरल मैनेजर (GGM) वी.के. अस्थाना, आर.के. गोयल, तथा ‘सुजाता होटल्स’ के निदेशक विजय कोचर और विनय कोचर भी शामिल हैं.
गौरतलब है कि IRCTC का यह मामला रेलवे में जमीन के बदले नौकरी (‘लैंड फॉर जॉब’ केस) से पूरी तरह अलग है. आईआरसीटीसी घोटाला वर्ष 2004 में लालू प्रसाद यादव के केंद्रीय रेल मंत्री (2004 से 2009) रहने के दौरान हुआ था.
उस समय रेलवे बोर्ड ने विभाग के सभी रेलवे होटलों और ट्रेनों की कैटरिंग सेवाओं का पूरा नियंत्रण व संचालन आधिकारिक रूप से आईआरसीटीसी (IRCTC) को सौंप दिया था. इसी अवधि के दौरान झारखंड की राजधानी रांची और ओडिशा के पुरी में स्थित ऐतिहासिक बीएनआर (BNR) होटलों के रखरखाव, संचालन, विकास और लीज पर देने के लिए जारी किए गए टेंडर में भारी अनियमितताएं और पक्षपात किए जाने की बात उजागर हुई थी.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गहन वित्तीय जांच के बाद वर्ष 2017 में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अपनी चार्जशीट दाखिल की थी. ईडी की इस चार्जशीट में शामिल 16 प्रमुख नाम:
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वहीं, दूसरी ओर सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट पर भी अदालत विधिवत संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है, जिसमें लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव सहित कुल 13 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. अब 27 अगस्त 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट द्वारा आरोप तय करने पर आने वाले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हैं.
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