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बुलडोजर जस्टिस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने खींचे हाथ; सुनवाई से इनकार कर याचिकाकर्ताओं को दिया बड़ा झटका

Supreme Court Bulldozer Rules: देश भर में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने सभी अवमानना याचिकाओं को संबंधित हाई कोर्ट भेज दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सभी पक्षों की जिरह के बाद यह आदेश दिया है.

क्या है मामला?

दरअसल दायर अवमानना याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि ‘बुलडोजर जस्टिस’ के खिलाफ सुरक्षा उपाय तय करने वाले नवंबर 2024 के अहम फैसले का उल्लंघन करते हुए तोड़-फोड़ की कार्रवाई की गई. कोर्ट ने कहा कि हर मामले में अलग-अलग तथ्य और विवाद शामिल होंगे. लिहाजा संबंधित हाई कोर्ट के सामने मामले को उठाने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि हर दावे के तथ्यों पर फैसला नहीं कर सकता. सोमनाथ में कुछ मस्जिदों को गैर-कानूनी तरीके से गिराने के आरोप लगाने वाली अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पेश वरिष्ठ वकील हुफैजा अहमदी ने कहा कि कोर्ट को गंभीर उल्लंघनों के मामलों में दखल देना चाहिए, जो हलफनामों से साफ तौर पर जाहिर होते हैं.

बुलडोजर एक्शन से पहले 15 दिन पहले नोटिस भेजना होगा

अहमदी ने कहा कि अगर उन्हें मौका दिए जाएं, तो वो पंद्रह मिनट के भीतर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन को सबीत कर सकते है. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश जारी किया था. कोर्ट ने कहा था कि बुलडोजर एक्शन को लेकर कम से कम 15 दिन की मोहलत दी जानी चाहिए. नोडल अधिकारी को 15 दिन पहले नोटिस भेजना होगा. कोर्ट ने नोटिस को डिजिटल पोर्टल पर भी डालने को कहा था. कोर्ट ने तीन महीने के भीतर पोर्टल बनाने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि कानून की प्रक्रिया का पालन जरूरी है. सत्ता का दुरुपयोग बर्दास्त नही होगा. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि अधिकारी अदालत की तरह काम नही कर सकते हैं. प्रशासन जज नही हो सकता है. किसी की छत छीन लेना उसके मौलिक अधिकारों का हनन है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि,

सिर्फ आरोप के आधार पर किसी के घर को नहीं तोड़ा जा सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी का घर उसका सपना होता है कि उसका आश्रय कभी न छीने और हर घर का सपना होता है कि उसके पास आश्रय हो. हमारे सामने सवाल यह है कि क्या कार्यपालिका किसी व्यक्ति का आश्रय छीन सकती है जिसपर अपराध का आरोप है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बुलडोजर एक्शन का मनमाना रवैया बर्दास्त नहीं होगा. अधिकारी मनमाने तरीके से कम नही कर सकते. अगर किसी मामले में आरोपी एक है तो घर तोड़कर पूरे परिवार को सजा क्यों दी जाए? पूरे परिवार से उनका घर नही छीना जा सकता.

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-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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