(सुप्रीम कोर्ट)
Bengal Voter List Controversy: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग ने अपना जवाब दाखिल किया है. आयोग द्वारा दाखिल जवाब में अपीलों के निपटारे, नाम हटाए जाने, नाम दोबारा जोड़ने और चुनाव नतीजों पर एसआईआर के कथित असर को लेकर अपना पक्ष रखा है.
आयोग के मुताबिक नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित 37 लाख अपीले लंबित है. आयोग ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि अगर इसी रफ़्तार से अपीलों का निपटारा होता रहा तो 12 साल लग सकते हैं. इसको देखते हुए अपीलों को निपटारे के लिए ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने की मांग की है. आयोग ने कहा है कि 42 लोकसभा सीटों के हिसाब से एक-एक ट्रिब्यूनल के गठन के प्रस्ताव का सुझाव दिया है.
चुनाव आयोग के मुताबिक पश्चिम बंगाल में अब तक करीब 38.3 लाख एसआईआर अपीले दाखिल की जा चुकी है. इनमें से 10 सितंबर तक करीब 1.26 लाख अपीलों पर फैसला हुआ. आयोग के हलफनामे के मुताबिक इन मामलों में 1,13,943 लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए गए. यानी जिन अपीलों पर अब तक फैसला हुआ, उनमें 90 फीसदी से ज्यादा मामलों में नाम वापस जोड़ने के पक्ष में रहे.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 24 जिलों में 22.2 लाख से ज्यादा अपीलें ऐसे लोगों की हैं, जिनके नाम एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए थे. यानी जिन लोगों के नाम हटे, उनमें बड़ी संख्या ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए ट्रिब्यूनल का रुख किया है. 16 सितंबर को जब हलफनामा दाखिल किया गया था, तब ट्रिब्यूनलों के सामने 37, 05, 235 मामले लंबित थे.
मौजूदा रफ्तार से अगर ट्रिब्यूनल हफ्ते के सातों दिन काम करें, तो सभी मामलों पर फैसला लेने में146 महीने लगेंगे. चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि अगर किसी विधानसभा सीट पर 10 हजार नाम हटे और जीत का अंतर पांच हजार रहा, तो सिर्फ इन दोनों आंकड़ों को जोड़कर यह नहीं कहा जा सकता कि हटाए गए 10 हजार मतदाताओं की वजह से चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ.
इसके लिए यह देखना भी जरूरी होगा कि हटाए गए लोगों में कितने लोग वास्तव में पात्र मतदाता थे, कितने लोगों ने अपने नाम दोबारा जोड़ने के लिए अपील की और उन अपीलों का परिणाम क्या रहा. इसके अलावा, आयोग ने यह प्रस्ताव भी रखा है कि न्यायिक अधिकारियों को वर्क फ्रॉम होम करने और डिजिटल सुनवाई करने की अनुमति दी जाए. इससे अधिकारियों के आने-जाने का समय बचेगा और अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी आएगी. सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल कांग्रेस की एसआईआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस की याचिका से जुड़ा है. दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा था.
यह भी पढ़ें-ट्रैफिक चालान के नए नियमों से भड़के दिल्ली के वकील, 21 सितंबर को करेंगे पूर्ण हड़ताल और प्रदर्शन
-भारत एक्सप्रेस
अमृतसर के फेजपुरा इलाके में 12 वर्षीय किशोर किशन की घर के अंदर संदिग्ध परिस्थितियों…
Kejriwal Contempt Case: आपराधिक अवमानना मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और अन्य आप…
Mohammed Shami Politics: क्रिकेटर मोहम्मद शमी की RLD प्रमुख जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद…
Samay Raina Wedding Rumours: समय रैना और मेधा शंकर की शादी की अफवाहों के बीच…
PIA New Uniform Troll Pakistan Airlines: आर्थिक तंगी से जूझ रही पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA)…
चंडीगढ़ में 25 और 26 सितंबर को WISE 4.0 का आयोजन होगा, जिसमें महिला उद्यमिता,…