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नाखूनों पर दिख रहे सफेद पैच को न करें नजरअंदाज, मॉनसून में बढ़ सकता है नेल फंगस का खतरा

Nail Fungus Warning: मॉनसून का मौसम जहां गर्मी से राहत दिलाता है, वहीं यह कई तरह के फंगल और बैक्टीरियल संक्रमणों का खतरा भी बढ़ा देता है. में से एक है नेल फंगस, जिसे अक्सर लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि नाखूनों पर दिखाई देने वाले सफेद, पीले या भूरे रंग के छोटे-छोटे पैच कई बार नेल फंगस का शुरुआती संकेत हो सकते हैं. समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह संक्रमण नाखूनों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है.

क्या होता है नेल फंगस “ऑनिकोमाइकोसिस”

चिकित्सकीय भाषा में नेल फंगस को “ऑनिकोमाइकोसिस” कहा जाता है. यह माइक्रोस्कोपिक फंजाई के कारण होने वाला संक्रमण है, जो नाखून के नीचे, नेल बेड और आसपास की त्वचा को प्रभावित करता है. यह संक्रमण हाथों और पैरों दोनों के नाखूनों में हो सकता है, लेकिन पैरों के नाखूनों में इसका खतरा अधिक रहता है. इसका कारण यह है कि पैर लंबे समय तक जूतों और मोजों में बंद रहते हैं, जिससे वहां नमी और गर्मी बनी रहती है. जिससे फंगस पनपने लगते हैं.

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विशेषज्ञों के अनुसार, नेल फंगस की शुरुआत बेहद सामान्य लक्षणों से होती है. नाखून पर छोटा सफेद, पीला या भूरा धब्बा दिखाई देता है, जिसे लोग अक्सर सामान्य दाग समझ लेते हैं. लेकिन धीरे-धीरे यह संक्रमण बढ़ने लगता है. नाखून मोटा, रूखा और असामान्य आकार का हो सकता है. कई मामलों में नाखून से दुर्गंध भी आने लगती है और संक्रमण अन्य नाखूनों तक फैल सकता है.

बारिश में नेल फंगस का खतरा होता है ज्यादा

मॉनसून के दौरान इस समस्या का खतरा और बढ़ जाता है. बारिश का पानी, लगातार पसीना आना, गीले मोजे पहनना, नमी वाले जूते और पैरों को ठीक से न सुखाना फंगस के विकास को बढ़ावा देते हैं. यही कारण है कि बरसात के मौसम में पैरों की स्वच्छता और देखभाल पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है. डर्मेटोलॉजिस्ट बताते हैं कि नेल फंगस से बचाव के लिए पैरों और नाखूनों को हमेशा साफ और सूखा रखना चाहिए. गीले जूते-मोजे तुरंत बदलें, नाखूनों को नियमित रूप से काटें और किसी दूसरे व्यक्ति के जूते, मोजे या नेल कटर का इस्तेमाल न करें. यदि नाखूनों में रंग बदलना, मोटापन या बदबू जैसी समस्या दिखाई दे तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें. शुरुआत में उपचार आसान होता है,वहीं संक्रमण बढ़ने पर डॉक्टर्स को ही दिखाएं.

भारत एक्सप्रेस

Swati Pandey

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