Ayurveda Ahar Guidelines Ministry of Ayush
Ayurveda Ahar Guidelines: आज के आधुनिक दौर में लोग अपनी सेहत और खान-पान को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक हो रहे हैं. क्या खाना चाहिए, किस तरह का भोजन हमारी दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए और पारंपरिक खान-पान का असली महत्व क्या है, इन सवालों पर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. इसी दिशा में लोगों को जागरूक करने के लिए आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विशेष जानकारी साझा की है. मंत्रालय के अनुसार, ‘आयुर्वेद आहार’ केवल भोजन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद के प्राचीन सिद्धांतों, समृद्ध परंपराओं और आधुनिक मानकों का एक बेहतरीन संतुलन है.
आयुर्वेद आहार को गुणवत्तापूर्ण, प्रामाणिक और पारदर्शी बनाए रखने के लिए देश में एक निर्धारित नियामक व्यवस्था लागू की गई है. इसके लिए खाद्य सुरक्षा और मानक (आयुर्वेद आहार) विनियम, 2022 के तहत एक विशेष नियामक ढांचा (Regulatory Framework) तैयार किया गया है. इस व्यवस्था में ‘श्रेणी ए’ के कड़े मानक भी शामिल हैं. इसका मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद आहार के उत्पादन, उसके निर्माण के तरीकों और उससे जुड़ी जानकारियों को एक व्यवस्थित, प्रामाणिक और जिम्मेदार ढांचे के भीतर लाना है, ताकि उपभोक्ताओं को सही और सुरक्षित उत्पाद मिल सकें.
आयुर्वेद आहार की इस पूरी अवधारणा को आसान भाषा में समझने के लिए तीन प्रमुख बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं— आहार, परंपरा और मानक.
आहार का सीधा अर्थ है कि हम दैनिक जीवन में क्या खाते और पीते हैं. हमारे रोजमर्रा के भोजन में शामिल सभी चीजें हमारी आहार व्यवस्था का हिस्सा हैं. आयुर्वेद में भोजन को केवल भूख मिटाने का साधन नहीं माना गया है, बल्कि इसे सही खान-पान, उत्तम स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली के मुख्य स्तंभ के रूप में देखा जाता है.
भारत में भोजन तैयार करने और उसे ग्रहण करने से जुड़ा ज्ञान सदियों से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता रहा है. देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम, स्थानीय खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर भोजन बनाने के अनोखे तरीके देखने को मिलते हैं. यही पीढ़ियों से चला आ रहा वैज्ञानिक ज्ञान ‘आयुर्वेद आहार’ का मूल आधार है.
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किसी भी खाद्य पदार्थ के उत्पादन और उसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए स्पष्ट नियमों का होना अनिवार्य है. मानक इसी पारदर्शी व्यवस्था की नींव हैं. ये नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि बाजार में मिलने वाला आयुर्वेद आहार एक तय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के तहत ही तैयार किया गया हो.
आयुष मंत्रालय का मानना है कि जब परंपरा से चले आ रहे प्राचीन ज्ञान को आधुनिक सुरक्षा मानकों और सही आहार नियमों के साथ जोड़ा जाता है, तभी ‘आयुर्वेद आहार’ का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचता है. यह पहल न केवल लोगों को सेहतमंद जीवनशैली अपनाने में मदद करेगी, बल्कि भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति को भी वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाएगी.
भारत एक्सप्रेस
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