कला-साहित्य

Indian Journalism Festival 2025: CMD उपेन्द्र राय का AI और उसके भविष्य पर संबोधन, जानिए क्या-कुछ कहा

Indian Journalism Festival 2025: इंदौर स्थित स्टेट प्रेस क्लब के, भारतीय पत्रकारिता महोत्सव के 17 वें सीज़न में भारत एक्सप्रेस के सीएमडी उपेन्द्र राय ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की. इस कार्यक्रम में उन्‍होंने एआई की आंधी और भविष्य विषय पर, जिसमें आप, देश, दुनिया, नीति समाज, जीवन और रोज़गार से जुड़े लाभ और हानि पर प्रकाश डाला। स्टेट प्रेस क्लब के इस गरिमामई आयोजन में, देश के नामचीन पत्रकार, संपादक, कार्टूनिस्ट और साहित्य जगत की हस्तियां उमड़ीं.

सीएमडी उपेन्द्र राय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मैं एआई को किसी भी तरह से खतरे के रूप में नहीं देखता हूं, बल्कि एक अवसर के रूप में इसे देखता हूं, ऐसा इसलिए क्योंकि जो दुनिया भर की रिपोर्ट बता रही हैं, करीब 80 करोड़ नौकरियां इस एआई से जाएंगी, लेकिन 95 करोड़ नौकरियां पैदा भी होंगी. ऐसे में 15 करोड़ नौकरियों का इजाफा होगा.

उन्होंने कहा, एआई कभी भी ह्यूमन इंटेलिजेंस का मुकाबला नहीं कर सकता है. भारत के महान गणितज्ञ हुए रामानुजम, जो हमारे दक्षिण भारत के तमिलनाडु के राज्य में पैदा हुए, और उनकी जो जीवनी बताती है कि वह 10वीं फेल हो गए , लेकिन गणित को लेकर जो उनकी समझ थी, भारत में आज तक किसी की नहीं है. रामानुजम की प्रतिभा गणित को लेकर बहुत अलग तरीके की थी. हालांकि, अन्य विषयों के बारे में उतनी जानकारी शायद नहीं रही होगी, इसलिए वह 10वीं फेल हो गए. उन्हें एक छोटी सी नौकरी मिली, उस समय अंग्रेजों का शासन था, एक दिन रामानुजम को डांट पड़ी कि क्या बैठकर हल करते रहते हो, क्या लिखते-पढ़ते रहते हो. एक दिन उनके सीनियर थे, उन तक ये बात पहुंची कि रामानुजम अपना काम कुछ घंटे में खत्म करके कुछ और करता है. जब वह आए और देखा, उस अफसर को भी थोडड़ी बहुत गणित की समझ थी. उसने जब रामानुजम के गणित के फॉर्मूले और प्रमेय को देखा तो बहुत प्रभावित हुआ. उसने रामानुजम के बारे में पता किया कि गणित का ज्ञान उसे इतना कहां से आया? वह अफसर हैरान हो गया कि जो व्यक्ति एक क्लर्क की नौकरी उसके ऑफिस में करता है, उसे गणित का इतना गूढ़ ज्ञान कैसे है? कि ये गणित की रचना कर रहा है. उस अफसर ने कहा कि जितनी मेरी समझ है, ये आदमी कुछ अद्भुत कर रहा है. उस समय ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दुनिया के बहुत मशहूर गणितज्ञ थे, प्रोफेसर हार्डी, उस अफसर ने करीब 300 गणित के फॉर्मूलों को प्रोफेसर हार्डी के पास भेजा, जैसे ही प्रोफेसर ने उन फॉर्मूलों को देखा, तत्काल रामानुजम से संपर्क किया और लंदन बुलवाया. प्रोफेसर हार्डी ने लिखा है कि रामानुजम से जब कोई सवाल पूछा जाता था, तो रामानुजम सवाल खत्म होने से पहले ही जवाब दे देते थे.

सीएमडी उपेन्द्र राय ने आगे कहा कि हमारे यहां परंपरा है कि जब माथे पर तिलक लगाया जाता है तो सिर पर हाथ रख लेते हैं. जिस तीसरे नेत्र की बात की जाती है, जो कुंडलनी और चक्र के जागृत होने के बाद वह अवस्था साधकों को मिलती है, गणित के बारे में रामानुजम का भी कुछ ऐसा ही था. गणित का जब बी कोई नया फॉर्मूला, सिद्धांत या फिर सवाल आता था, तो रामानुजम की पुतलियां थोड़ा ऊपर चढ़ जाती थीं. उसी पल उत्तर आ जाता था. एक बार जब रामानुजम बीमार थे, तो प्रोफेसर हार्डी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे, जब रामानुजम ने प्रोफेसर की कार का नंबर देखा, तो उन्होंने कहा कि इसपर ज्यामितीय के चार सिद्धांत बन सकते हैं. प्रोफेसर हार्डी ने अपनी किताब में लिखा है. प्रोफेसर हार्डी ने लिखा है कि तीन सिद्धांतों को लिखने में उन्हें 28 साल लगे, और उसके 28 साल बाद प्रोफेसर हार्डी ने अपनी वसीयत में लिखा कि रामानुजम ने कहा है कि इसके चार ज्यामितीय सिद्धांत निकल सकते हैं मेरे कार के नंबर से, और इनको सिद्ध किया जा सकता है तो गलत नहीं हो सकते हैं. ऐसा जरूर होगा. प्रोफेसर ने उस शोध के लिए अपनी वसीयत में जो लिख कर गए थे, 28 साल बाद वह चौथा सिद्धांत ढूंढा गया.

सीएमडी उपेन्द्र राय ने कहा, एआई, हमारी आपकी तरह ही किसी आदमी के द्वारा कृत्रिम रूप से तैयार की गई चीज है. मैं मानता हूं कि पत्रकारिता को कितना खतरा है, तो पत्रकारिता को खतरा नहीं, बल्कि सुविधा मानता हूं. लोगों को लगता है कि एआई के आने से उनकी नौकरियां जाएंगी, हां, हो सकता है कि कुछ लोगों की नौकरियां जाएं, टेलीप्रांप्टर पढ़ने वाले जो कुछ एंकर्स हैं, हो सकता है उनकी नौकरी जाए, लेकिन जिसकी कंटेंट को लेकर समझ है, कंटेंट से लबरेज है, जिसके पास लिखने की स्टाइल है, बोलने की अपनी एक शैली है, ऐसे किसी भी व्यक्ति की नौकरी नहीं जाने वाली है. बल्कि ऐसे आदमी के प्रोटोटाइप रोज तैयार होंगे और अलग-अलग मंचों से आप देखेंगे कि ये फलां आदमी से प्रोटोटाइप तैयार किया गया है और आगे खबर को प्रस्तुत किया जा रहा है.

उन्होंने आगे कहा, अभी कुछ बातों से लोग डर रहे हैं. ली सिडोल चेस के बहुत अच्छे प्लेयर रहे हैं. एआई के प्रोटोटाइप रोबोट ने ली सिडोल को 8 मिनट के अंदर 8 बार हरा दिया.

यानी कि वर्ल्ड चैंपियन को प्रोटोटाइप AI ने 8 मिनट में 8 बार हरा दिया. अब इसको कोई सामान्य बुद्धि का व्यक्ति सुने तो उसे लगेगा कि एआई से बहुत खतरा है, लेकिन मैं इसे खतरा नहीं मानता. क्योंकि आदमी की बुद्धि और मशीन की बुद्धि, दोनों में बड़ा गहरा अंतर है. क्योंकि मशीन के अंदर जो डेटा डाला गया है, जो समझाया गया है, मशीन उतना ही रिस्पांस करेगी. जब उस एआई रोबोट से पूछा गया कि तुमने एक विश्व चैंपियन को 8 मिनट में 8 बार कैसे हरा दिया? इसपर रोबोट ने उत्तर दिया कि जिस दिन ली सिडोल जिंदगी में पहली बार चेस खेलने के लिए बैठे थे, और इनके मां-बाप ने वीडियो बनाया था, उस वीडियों के सफर से लेकर वर्ल्ड चैंपियन बनने तक के सफर के एल्गोरिथम का अध्ययन मैंने कर लिया. अब मुझे जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता दी गई है, मैंने उसी के आधार पर ली सिडोल को हरा दिया. अगर, हम मशीन या रोबोट से कंपटीशन करेंगे तो बार-बार हारेंगे. उस हारने को मैं इसलिए हारना नहीं कहूंगा क्योंकि मशीन से कंपटीशन करना मूर्खता है.

सीएमडी उपेन्द्र राय ने कहा, अभी मैं एक कार्यक्रम में बोलने के लिए गया था. वहां पर बोल रहा था कि ये परमात्मा की बनाई सत्ता है. इसलिए कोई भी मशीन, एआई, कंप्यूटर या सुपर कंप्यूटर आ जाए, वह धीरे-धीरे सूक्ष्मतम रूप लेती जाएगी, लेकिन आदमी का विकल्प कुछ और नहीं हो सकता है, बल्कि आदमी ही हो सकता है. मशीन आदमी नहीं हो सकती है, आदमी से बहतर काम कर सकती है, लेकिन कोई भी मशीन इस सीमा तक नहीं पहुंच पाएगी कि वह आदमी बना दे. कोई भी वैज्ञानिक ऐसी मशीन नहीं तैयार कर सकता है कि जो हम सुबह नाश्ते में खाते हैं या लंच करते हैं उसे तुरंत खून बना दे. अगर ऐसा किसी दिन हो गया तो मैं मान लूंगा कि ईश्वर की सत्ता हार गई और मशीनों को बनाने वाले की सत्ता जीत गई. इसलिए जो AI से खतरे हैं, जो हम हॉलीवुड की मूवीज देखते हैं, उनमें ज्यादा डराया जाता है. जब पहला विश्व युद्ध हुआ था, तब अमेरिका इतना विकास कर चुका था, हालांकि अंग्रेजों का शासन था, 4 जुलाई 1776 को आजाद हो चुका था. तब तक पूरी दुनिया में ब्रिटेन का शासन था. अमेरिका के वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि हमें अपनी सॉफ्ट पावर को बढ़ाना चाहिए., और अपनी सॉफ्ट पावर को बढ़ाने के लिए अपनी फिल्मों के जरिए, संस्कृति के जरिए दुनिया को बताएं कि अमेरिका कहां पहुंच चुका है. लेकिन तब ये तय किया गया कि अभी सही समय नहीं है, क्योंकि पूरी दुनिया पर ब्रिटिश शासन है. और इनके राज में सूरज नहीं डूबता, इसलिए ऐसे वक्त में हम ये काम करेंगे, तो हमें मुंह की भी खानी पड़ेगी. जब दूसरा विश्व युद्ध हुआ, तो दूसरे विश्व युद्ध के आते-आते अमेरिका ने पूरी दुनिया को ये बता दिया है कि इस पृथ्वी के सबसे तकतवर देश हम हैं, और हमारे इर्द-गिर्द ही पूरी दुनिया का ध्रुवीकरण होता है. ऐसा संभव बेशक तकनीक के जरिए हुआ, ये संभव उनकी वैज्ञानिक सोच की वजह से हुआ. इसलिए मैं मानता हूं कि भारत ने एक धारणा ने देश का बड़ा नुकसान किया है. रुपया-पैसा ये सब मोह-माया है. इसी मोह-माया की वजह से हमारे अंदर एक आधा-अधूरापन रहता है. हमारा युवा युवा होते हुए भी बहुत जल्दी संन्यासी होना चाहता है, बहुत जल्दी भागना चाहता है, बहुत जल्दी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेता है.

सीएमडी उपेन्द्र राय ने कहा, मेरा मानना है कि जिस तरह से पूरी दुनिया में साम्यवाद का खात्मा हुआ, और अमेरिका में जो पूंजीवाद था, वह जीता. दूसरी तरफ भारत में जो तरक्की होनी चाहिए थी, वह तरक्की बहुत धीमी गति से हुई. हम इतने वैज्ञानिकता वाला देश होते हुए भी विज्ञान से मुंह मोड़ लिया. हमने अंधविश्वास से अपना गहरा नाता जोड़ा. मैं अपने देश की आलोचना नहीं कर रहा हूं, लेकिन आलोचना भी होनी चाहिए. यहां एक उदाहऱण दूंगा, 1986 तक भारत की इकोनॉमी 1 ट्रीलियन डॉलर की थी, और इतनी ही चीन की भी थी, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि तब से लेकर आज तक चीन 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी है और हम अभी सिर्फ 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हैं. इसलिए कुछ तो बुनियादी भूल हुई होगी हमसे, क्या बुनियादी गलती हुई, उसपर एक उदाहरण दूंगा. जैसे एक सिद्धांत है कि 100 डिग्री पर पानी उबलने लगता है और भाप बन जाता है. उसी तरह से एक प्रकृति का अनकहा सिद्धांत है पांच प्रतिशत का. जब चीन का कोरिया के साथ कोई छद्म युद्ध हुआ तो चीन के सैनिकों ने साउथ कोरिया के सैनिकों को बंदी बनाया, और उसमें से पांच फीसदी सैनिकों को अलग किया गया. क्योंकि चीन के लोग जैसा चाह रहे थे, वैसा वह कर नहीं रहे थे. इसलिए चीन के मनोवैज्ञानिकों ने सलाह दी कि इसमें जो तेज बुद्धि के और उपद्रवी सैनिक हैं, उन्हें अलग कर दो, बाकी के 95 फीसदी अपने आप शांत हो जाएंगे. उसी तरह से पशु-पक्षियों में भी एक सिद्धांत है,. जैसे हर कबूतर चिट्ठी नहीं पहुंचा देता है. उनमें भी 5 फीसदी कबूतर हैं, जिन्हें ट्रेनिंग दी जाती है. जो, जहां बताया जाता था वहां पर चिट्ठी पहुंचाते थे. अभी मैंने कई फिल्में देखी हैं, जिसमें एक फिल्म में किसी कबूतर को सर्वश्रेष्ठ देश सेवा का मेडल मिला. क्योंकि युद्ध के समय उसने बहुत महत्वपूर्ण सूचना पहुंचाई थी.

उन्होंने कहा, आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जमाना है, जब औद्योगिक क्रांति हुई, तब भी यही सवाल आया था कि सारे लोग बेरोजगार हो जाएंगे, लेकिन रोजगार और ज्यादा निकल कर आए. मेरा मानना है कि AI भारत में बहुत अच्छी तरीके से आ चुका है. मीडिया में हम लोग इस्तेमाल भी कर रहे हैं. मीडिया में जितने भी वॉयस ओवर अब होते हैं, उसमें से 50 फीसदी तो AI के जरिए हो रहे हैं. मेरे ऑफिस में भी कुछ उपद्रवी बच्चे-बच्चियां हैं, जो रोज चैटजीपीटी की मदद से 5 शिकायतें भेजते हैं. एक दन मैंने पूछा कि 10-10 पेज का ये किस समय बैठकर लिख लेते हो, तो एक लड़के ने कहा कि ChatGpt से लिखते हैं, तो ChatGpt ने एक सुविधा भी दी है.

सीएमडी उपेन्द्र राय ने कहा, भारत के लोग AI और रोबोट को लेकर Thrilled क्यों हैं? तो जब मैं सुबह आ रहा था, तब सोच रहा था कि हमारा भी जीवन कुछ मशीन जैसा ही है. तीन जगह है हमारे जीवन है.

पहला- पशुओं का जगत है. वे जैसे पैदा हुए, वह उसी तरह से बड़े हुए, मतलब उनमें कोई बदलाव नहीं आया. दूसरा जगत है बुद्धों का- जो होने के लिए वह आए थे, उसे उन्होंने प्राप्त कर लिया. उनमें से कोई राम हो गए , कोई बुद्ध तो कोई महावीर और कृष्ण हो गए. ये एक लंबी परंपरा है. बीच में हम मनुष्य हैं. हमारे जीवन में बड़ा तनाव है. हम जो होना चाहते हैं, वह अभी हैं नहीं. उसके लिए हम लगातार संघर्ष कर रहे हैं. हमसे अच्छा जीवन पेड़ पौधों का है. वह भी जमीन से पोषण ले रहे हैं, लेकिन एक गहरा अनुशासन है. बसंत ऋतु आती है तो पूरे माहौल को बदल देते हैं, लेकिन हम किसी को क्या दे रहे हैं? सिर्फ अपना परिवार पालने के अलावा क्या करते हैं. बस मान सकते हैं कि यहां पर भी वही 5 प्रतिशत का सिद्धांत है. कितने लोग हैं जो अपनों को छोड़कर किसी दूसरे के लिए जी रहे हैं. ऐसे में क्या हम किसी मशीन की तरह नहीं जी रहे हैं. मैं सोचता हूं कि हम मशीन बनकर ही रह गए हैं.

सीएमडी उपेन्द्र राय ने कहा, यहा मैं एक और चीज बताना चाहूंगा कि मनुष्यता क्या है, मानव धर्म क्या है, जीवन क्या है? मशीन और आदमी की सत्ता अलग क्यों रहेगी? मैं मानता हूं कि आज का जो समय है, वह पृथ्वी पर उतरा हुआ अब तक का सबसे सुंदरतम समय है. सबसे सुंदरतम समय में हम जी रहे हैं. साल 1982 मेरा जन्म हुआ. उस समय तक, जब बच्चे पैदा होते थे, तो पीलिया और टिटनेस हो जाता था. उस समय के 70 फीसदी बीमार पैदा होते थे. उनके अंदर की जीवंत ऊर्जा बीमारी से लड़ने में खर्च हो जाती थी. कुपोषण था, लेकिन अब जैसे ही मां बच्चे को कंसीव करती है, उस दिन से लेकर पैदा होने तक डॉक्टर की निगरानी में रहता है. वह जल्दी बीमार नहीं होता है. यहां तक की अब ये तकनीक आ गई है कि बच्चे की आंख का कलर नीला हो या काला हो, ये सुविधा भी उपलब्ध है. 1975 में संत रजनीश ने अपने एक भाषण में कहा था कि 50 साल इंतजार करो, फिर जैसे दुकानों पर बैंगन, टमाटर के बीज के पैकेट रखे रहते हैं, उसी तरह से डॉक्टर की दुकानों में बच्चों की लगी फोटो, कितने साल ये जिएगा, कौन सी बीमारी होगी, कैसा कलर होगा, कैसा व्यवहार होगा? ये जानकारी भी मिलेगी. आज ऐसी सुविधा हो गई है. दिल्ली-मुंबई और पुणे में तमाम ऐसे डॉक्टर हैं, जो इस तरह की सुविधा देते हैं.

सीएमडी उपेन्द्र राय ने कहा, आज के समय में डॉक्टर बताते हैं कि जो जितना कम खाएगा, उतना ज्यादा जीवन जिएगा और उतना ही कम बीमार रहेगा. जब हम आदिमानव थे, तो हम सबसे डरे हुए लोग थे. हमारे अंदर बुद्धि का विकास नहीं हुआ था, लेकिन पहली क्रांति हुई और आदिमानव ने आग का अविष्कार किया. आग का अविष्कार इस मनुष्यता का सबसे बड़ा अविष्कार है. इसके अविष्कार के बाद आदमी बड़े से बड़े जानवर को डराने लगा, जिसके बाद जंगल में हमारा शासन हुआ. ये दूसरा कालखंड था. जब मानव को शक्ति मिली. इसके बाद तीसरा युग शुरू हुआ, जिसमें इंसानों को कपड़ा पहनने और समूहों में रहने की कला आई. चौथे युग में राज्य बनने लगे, अविष्कार होने लगे. पांचवें युग में सुविधाएं थी,लेकिन वह चुनिंदा लोगों के पास थीं, पिर छठवां युग आया. जब छोटे कलपुर्जे इस्तेमाल में आने लगे. उसके बाद सातवां युग आया. इस युग में औद्योगिक क्रांति हुई और कंप्यूटराइजेशन हुआ. इसके बाद आठवां युग आया, जिसमें AI आ गया और स्टार्टअप आ गए. इसलिए दुनिया आदिम से लेकर यहां तक पहुंची है तो इसमें टेक्नोलॉजी का बेशक योगदान है. इसलि मैं कहना चाहता हूं कि इस तकनीक ने हमें यहां तक पहुंचाने में बहुत योगदान दिया है. इससे हमें कुछ नुकसान नहीं हुआ है. इसलिए अब जो AI आ रहा है उससे न तो पत्रकारिता जगत का नुकसान होना है और ना ही आम आदमी के जीवन में कोई नुकसान होना है. बल्कि में हम जहां खड़े हैं, वहां से एक क्वांटम जंप लेकर एक नए मनुष्य के जन्म देने की दिशा में आगे बढ़ने वाले हैं.

Shailendra Verma

Recent Posts

Microsoft Layoff Alert: AI के दौर में 60,000 कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर, जानें क्या है कंपनी की योजना

Microsoft Layoff Alert: माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका, भारत, ब्रिटेन और कनाडा में करीब 60,000 पात्र कर्मचारियों…

2 minutes ago

कार्तिक मास का आरंभ: आज दोपहर बाद बन रहे हैं ये 2 शक्तिशाली योग, जानें पूरा पंचांग

27 अक्टूबर 2026 से उत्तर भारत की अमांत परंपरा के अनुसार कार्तिक मास की शुरुआत…

40 minutes ago

सिर्फ 10,000 स्टेप्स चलना काफी नहीं! फिट रहने के लिए अपनाएं ये 5 हेल्दी आदतें

Fitness Health Tips: फिट रहने के लिए रोजाना 10,000 कदम चलना ही जरूरी नहीं है.…

1 hour ago

वृषभ राशि वालों की मेहनत लाएगी रंग, ऑफिस में होगी तारीफ; जीवनसाथी से बहस करने से बचें

Aaj Ka Rashifal Vrishabh Rashi: वृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन करियर में…

1 hour ago