हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत (Hindustani Classical Music) की गहन दुनिया में प्रवेश करना किसी यात्रा से कम नहीं है, जहां रागों की लहरें, तालों की धड़कन और गुरुओं की परंपराएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. ऐसे में पंडित अमरनाथ द्वारा रचित हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का शब्दकोष एक ऐसा प्रकाशस्तंभ है, जो इस जटिल कला को सरल और सुलभ बनाता है.
पंडित अमरनाथ, इंदौर घराने के विख्यात गायक और संगीतकार, जिन्हें ‘संगीतकारों का संगीतकार’ कहा जाता है, ने मूल रूप से अंग्रेजी में The Dictionary of Hindustani Classical Music लिखा था. अब इसका हिंदी अनुवाद राकेश पाठक द्वारा राजकमल प्रकाशन से 2025 में प्रकाशित हुआ है, जो 216 पृष्ठों का यह पेपरबैक संस्करण है. रेखा भारद्वाज की भावपूर्ण प्रस्तावना और बिंदु चावला द्वारा लिखित जीवन-परिचय इसे और भी जीवंत बनाते हैं.
पुस्तक का मूल स्वरूप एक शब्दकोश है, लेकिन यह मात्र शब्दों की सूची से कहीं आगे जाता है. इसमें हिंदुस्तानी संगीत की तकनीकी शब्दावली-जैसे ‘आवर्त’, ‘खरज भरना’, ‘मूर्छना’ और ‘श्रुति’ को सरल हिंदी में व्याख्यायित किया गया है. लेखक ने न केवल शब्दों के अर्थ बताए हैं, बल्कि उनकी व्युत्पत्ति, संगीत अभ्यास में निहितार्थ और दार्शनिक पक्ष को भी छुआ है. गुरुओं की प्रसिद्ध उक्तियां, कहावतें और मुहावरे शामिल हैं, जो संगीत की सांस्कृतिक गहराई को उजागर करते हैं. उदाहरणस्वरूप, ‘संगीत फकीरी का नाम है’ जैसी उक्तियां पंडित जी के चिंतन को प्रतिबिंबित करती हैं. यह ग्रंथ छात्रों, संगीतकारों, भाषाविदों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक संरचित मार्गदर्शक है, जो परंपरा को आधुनिक संदर्भ में जीवित रखता है.
पुस्तक की सबसे बड़ी ताकत उसकी सरलता और प्रामाणिकता है. पंडित अमरनाथ की वर्षों की साधना से निकली यह सामग्री संगीत की शुद्धता को बनाए रखते हुए आम पाठक तक पहुंचाती है. हिंदी अनुवाद ने इसे भारतीय सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम बना दिया है, जो अंग्रेजी माध्यम की सीमाओं को तोड़ता है. लॉन्च इवेंट में रेखा भारद्वाज ने साझा किया कि पंडित जी मात्र 15 मिनट में इतना सिखा देते थे कि पूरा सप्ताह रियाज में बीत जाता.
यह पुस्तक उसी गहनता का लिखित रूप है. अमरजीत जस जैसे शिष्यों ने इसे ‘शब्दों का अद्भुत भंडार’ बताया, जो युवाओं को सुनने और सीखने की प्रेरणा देगा. कोई स्पष्ट कमजोरी नजर नहीं आती. हालांकि, तेज-तर्रार डिजिटल युग में इसकी गहराई वाले प्रारूप को कुछ पाठक भारी लग सकता है, लेकिन यही तो इसकी ताकत भी है. यह जल्दबाजी में नहीं, बल्कि धैर्य से पढ़ने लायक किताब है.
कुल मिलाकर, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का शब्दकोष एक विरासत का पुनरुद्धार है, जो संगीत की आत्मा को शब्दों में बांधता है. यदि आप शास्त्रीय संगीत के दीवाने हैं या इसे समझना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपकी शेल्फ पर अनिवार्य होनी चाहिए. यह न केवल ज्ञान देती है, बल्कि भावनाओं को भी जगाती है. एक सच्ची श्रद्धांजलि पंडित अमरनाथ की अमर गायकी को.
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-भारत एक्सप्रेस
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