नैनन में आन-बान: स्वरों की आलापचारी में डूबती एक आत्मीय यात्रा
यतीन्द्र मिश्र की नई पुस्तक 'नैनन में आन-बान' शास्त्रीय संगीत की शुष्क व्याख्या नहीं, बल्कि सुरों की एक आत्मीय यात्रा है. यह किताब 12 महान संगीतकारों के जीवन और उनकी गायकी के जरिए पाठक को रागों की दुनिया से जोड़ती है.
पंडित अमरनाथ की विरासत का पुनरुद्धार, शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के लिए प्रकाशस्तंभ है यह नई पुस्तक
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गहन दुनिया में प्रवेश करना किसी यात्रा से कम नहीं है, जहां रागों की लहरें, तालों की धड़कन और गुरुओं की परंपराएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं.
शास्त्रीय संगीत के दुनिया में उस्ताद विलायत खान जैसा कोई दूसरा न हुआ, इस वजह से तीन बार ठुकराया था पद्म सम्मान
उस्ताद विलायत खान पिछले 60 वर्षों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे महान हस्तियों में से एक थे. अपने सितार वादन में गायन शैली को अपनाने ने उन्हें काफी शोहरत दिलाई.
दिल्ली में ‘याद-ए-बिस्मिल्लाह’ का आयोजन, गीत-संगीत की प्रस्तुति से शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान को किया गया नमन
राजधानी दिल्ली स्थित संस्कार भारती में ‘याद-ए-बिस्मिल्लाह’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. भारत एक्सप्रेस समाचार चैनल ने इस आयोजन में सहयोग दिया.
‘आप यहां बनारस बना दीजिए…’, अमेरिका में बसने के प्रस्ताव पर बिस्मिल्लाह खान ने जो कहा वो सबको सुनना और जानना चाहिए
बिस्मिल्लाह खान की उम्र जब 6 साल ही थी तब वह शहनाई की शिक्षा के लिए वाराणसी अपने मामा अली बख्श के पास आ गए थे. उनके उस्ताद मामा काशी विश्वनाथ मंदिर में शहनाई बजाते थे. यहीं से उन्होंने शहनाई को अपना पहला प्यार बनाया.





