Aaj Ka Panchang 17 July 2025: हर साल की तरह 2025 भी अपने साथ नई शुरुआत, उत्सव, धार्मिक अनुष्ठानों और जीवन के खास निर्णयों के अवसर लेकर आया है. ऐसे में पंचांग हमारे लिए एक ऐसी खगोलीय घड़ी बन जाता है, जो सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्रों और योगों की चाल के अनुसार हमें बताता है कि किस समय कौन-सा कार्य करना शुभ रहेगा और कब सावधानी बरतनी चाहिए.
इस वर्ष के दौरान ग्रहों की स्थिति, ऋतुओं का क्रम, व्रत-त्योहारों के योग और शुभ-अशुभ मुहूर्तों की जानकारी लेकर आया है ये वार्षिक पंचांग.
2025 में सूर्य देव कुल 12 बार राशि परिवर्तन करेंगे, यानी संक्रांति के माध्यम से हर महीने एक नई राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य की मकर संक्रांति हमेशा की तरह 14 जनवरी को होगी, जो नए शुभ कार्यों की शुरुआत का संकेत देती है.
सूर्य का तेज इस वर्ष सिंह, धनु और मकर राशि के जातकों को विशेष लाभ देगा, जिससे इन लोगों को आत्मविश्वास और नेतृत्व की क्षमता में वृद्धि मिलेगी. वहीं सूर्य ग्रहण वर्ष में दो बार पड़ेगा, पहला 29 मार्च को और दूसरा 23 सितंबर को.
ये दोनों ग्रहण भारत में आंशिक रूप से दिखाई देंगे, और इनके दौरान पूजा-पाठ, भोजन और शुभ कार्य वर्जित माने जाएंगे.
चंद्रमा, जो हर दो ढाई दिन में राशि बदलता है, पूरे वर्ष 12 पूर्णिमा और 12 अमावस्या लेकर आएगा. साल की कुछ खास पूर्णिमाएं, जैसे माघ, वैशाख, गुरु और शरद पूर्णिमा.साधना, ध्यान, व्रत और धार्मिक दान के लिए अत्यंत शुभ मानी जाएंगी. वर्ष 2025 में चंद्र ग्रहण दो बार
होगा,एक 14 मार्च को और दूसरा 7 सितंबर को.
चंद्र ग्रहण का असर विशेष रूप से कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों पर मानसिक रूप से देखा जा सकता है, इसलिए उन दिनों मन को स्थिर रखने के लिए ध्यान, जप और संयम का पालन करना लाभकारी रहेगा.
शुभ मुहूर्तों की दृष्टि से यह वर्ष कई मायनों में अनुकूल रहने वाला है. अप्रैल से जून और फिर अक्टूबर से दिसंबर तक विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, भूमि पूजन और नामकरण जैसे शुभ कार्यों के लिए अनेक अच्छे योग बनेंगे.
इन महीनों में नक्षत्रों और ग्रहों की स्थिति ऐसी रहेगी, जो सफलता और सौभाग्य को बढ़ावा देगी. विशेषत: वैशाख और कार्तिक मास में धार्मिक अनुष्ठान करना अत्यंत शुभ माना जाएगा.
वर्ष की शुरुआत और मध्य (जनवरी-मार्च और जुलाई–सितंबर) के कुछ समय ऐसे रहेंगे, जब अशुभ मुहूर्त अधिक होंगे, विशेष रूप से ग्रहण काल, संक्रांति के तुरंत पहले और भरणी, कृत्तिका या अश्लेषा नक्षत्र में. इन दिनों कोई भी बड़ा निर्णय टालना श्रेयस्कर होगा.
सप्ताह के हर दिन किसी-न-किसी दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है. जैसे सोमवार को पूर्व, मंगलवार को उत्तर, बुधवार को उत्तर-पश्चिम, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार को पश्चिम, शनिवार को पूर्व और रविवार को उत्तर दिशा में यात्रा करना अशुभ माना जाता है.
अगर किसी कारणवश यात्रा टालना संभव न हो, तो पंचांग के अनुसार उचित उपाय जैसे दही या तुलसी का सेवन कर यात्रा शुरू करना चाहिए, ताकि दिशा शूल का प्रभाव कम हो सके.
-भारत एक्सप्रेस
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