आस्था

Anant Chaturdashi Katha: अनंत चतुर्दशी पर इस कथा के बिना अधूरा है व्रत, पाठ करने से होगी हर मनोकामना पूरी

Anant Chaturdashi Katha: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर साल हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. इस दिन गणेश भगवान की मूर्ति का विसर्जन करने के साथ-साथ व्रत रखना भी खास महत्व रखता है.

अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है और विधिपूर्वक व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति मानी जाती है.

अनंत चतुर्दशी की पौराणिक कथा

महाभारत काल में, महाराज युधिष्ठिर ने एक बार राजसूय यज्ञ का आयोजन किया था. यज्ञ मंडप की रचना इतनी अद्भुत थी कि स्थल और जल में भ्रम हो गया. इसी कारण, दुर्योधन गलती से जलकुंड में गिर पड़े. द्रौपदी के कटु वचन से दुर्योधन को अपमानित महसूस हुआ और उसने छलपूर्वक युधिष्ठिर को द्युत यानी जुए के लिए आमंत्रित किया. यहीं से पांडवों को बारह साल का वनवास मिल गया.

वनवास के दौरान, पांडवों ने कई कठिनाइयाँ झेली. एक दिन वन में भगवान कृष्ण युधिष्ठिर से मिले और उनसे अपने हालात बताए. कृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी व्रत करने की सलाह दी और बताया कि इसे करने से खोया हुआ राज्य और सुख-समृद्धि वापस प्राप्त की जा सकती है.

ये भी पढ़ें- Anant Chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी आज, जानिए गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

ब्राह्मण कौण्डिन्य और सुशीला की कथा

भगवान कृष्ण ने व्रत की महिमा बताते हुए एक प्राचीन कथा सुनाई. एक ब्राह्मण की कन्या सुशीला का विवाह कौण्डिन्य ऋषि से हुआ. एक रात सुशीला ने अपने पति से अनंत व्रत का महत्व पूछा और उसी स्थान पर व्रत आरंभ किया. उसने 14 गांठों वाला डोरा अपने हाथ में बांधा.

कौण्डिन्य ऋषि ने जब डोरा देखा तो गुस्से में आग लगा दी. इससे अनंत भगवान का अपमान हुआ और ऋषि की सारी संपत्ति नष्ट हो गई. पश्चाताप में ऋषि अनंत भगवान की खोज में वन में भटकते रहे. भगवान अनंत ने उनकी भक्ति और पश्चाताप से प्रसन्न होकर उन्हें निर्देश दिया कि 14 साल तक विधि-विधान से व्रत करना चाहिए. ऐसा करने पर उनके सारे कष्ट दूर हुए और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई.

व्रत का महत्व

युधिष्ठिर ने भी श्रीकृष्ण की आज्ञा से अनंत भगवान का व्रत किया, जिससे महाभारत के युद्ध में पांडवों को विजय मिली. इस दिन व्रत करने और कथा पढ़ने से जीवन में संकट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है.

अनंत चतुर्दशी व्रत धार्मिक श्रद्धा, सकारात्मकता, संयम और आध्यात्मिक लाभ का मार्ग है. इसलिए इस दिन पूजा, कथा पाठ और नियमपूर्वक व्रत रखना अत्यंत शुभ माना जाता है.

Also Follow Bharat Express on Instagram 

-भारत एक्सप्रेस 

Radha Priya

Recent Posts

चुनाव आयोग ने जारी किया नया शेड्यूल: 12 नवंबर को आएगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, जानिए कैसे करा सकते हैं सुधार

चुनाव आयोग ने यूपी-बिहार समेत 17 राज्यों में स्पेशल संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) शुरू करने का…

3 hours ago

‘भारत में भी सत्ता बदले…’, प्रशांत भूषण-नेहा बोरा के ‘रिजीम चेंज’ बयानों से छिड़ा विवाद, बांग्लादेश मॉडल के सुर अलापे

Delhi Protest News: राहुल गांधी की समर्थक नेहा बोरा बोलीं- 'बांग्लादेश ने हमें एक रास्ता…

5 hours ago

‘पैसे से नहीं चलती देश की नीतियां…’ स्टारलिंक को लेकर एलन मस्क पर बरसे बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे

आईटी संसदीय समिति के अध्यक्ष डॉ. निशिकांत दुबे ने स्टारलिंक के मुद्दे पर एलन मस्क…

5 hours ago

जेआरडी टाटा का वो सपना, जिसने भारत को दी पहली एयरलाइन; जानिए एयर इंडिया की दिलचस्प कहानी

जेआरडी टाटा को 1929 में भारत का पहला पायलट लाइसेंस मिला था. इसके बाद उन्होंने…

6 hours ago

‘सत्ता को सेवा में बदला’, पीएम मोदी के 25 वर्षों के कार्यकाल पर हिमाचल प्रदेश बीजेपी ने जताई कृतज्ञता

हिमाचल प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने…

6 hours ago