Braj 84 kosh Parikrama Viral Video: आज के आधुनिक दौर में जहां सोशल मीडिया पर सास-बहू के झगड़ों और परिवारों के टूटने के किस्से आम हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र से एक ऐसी अद्भुत और दिव्य तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर किसी का सिर श्रद्धा से झुक गया है. कलयुग के इस दौर में त्रेता युग जैसी मातृ-भक्ति और पारिवारिक संस्कारों की एक जीती-जागती मिसाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.
दरअसल ब्रज की पावन 84 कोस की परिक्रमा के दौरान सहपऊ इलाके में एक बहू अपनी बुजुर्ग और लाचार सास को एक बड़े से प्लास्टिक के टब में बैठाकर, उसे अपने सिर पर उठाए मीलों लंबे कठिन रास्तों पर परिक्रमा करती नजर आई है. इस भावुक कर देने वाले दृश्य का वीडियो अब इंटरनेट पर एक बड़ी सनसनी बन चुका है.
जानकारी के मुताबिक, इस बुजुर्ग सास की बरसों से यह दिली इच्छा थी कि वह अपने जीवन में एक बार ब्रजमंडल की पवित्र 84 कोस की परिक्रमा (Braj 84 kosh Parikrama) पूरी करें. लेकिन ढलती उम्र, शारीरिक कमजोरी और घुटनों के दर्द के कारण उनका एक-एक कदम चलना भी पूरी तरह से नामुमकिन हो चुका था.
जब उनकी इस लाचारी और मन की तड़प का पता उनकी बहू को चला, तो उसने बिना किसी संकोच या शिकायत के एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया जो आज के समाज के लिए एक बहुत बड़ा सबक है. बहू ने सास को आराम से एक टब में बैठाया और उसे अपने सिर पर उठाकर ‘राधे-राधे’ जपते हुए आस्था के मार्ग पर निकल पड़ी.
A daughter-in-law carrying her mother-in-law during the Braj 84 Kos Parikrama. ❤️
A rare example of love, respect, and devotion.
Radhe Radhe! 🙏 pic.twitter.com/QnrSuTUEpB
— shibya Sharma (@Shibyash_17) June 1, 2026
बिना थके, बिना रुके और चेहरे पर बिना किसी शिकन के अपनी सास को सिर पर उठाकर तपती सड़कों पर चलती इस बहू का वीडियो जैसे ही फेसबुक और एक्स (X) पर आया, लोगों के कमेंट्स की बाढ़ आ गई. लोग इस बहू के समर्पण की तुलना सीधे पौराणिक चरित्र ‘श्रवण कुमार’ से कर रहे हैं, जिन्होंने अपने नेत्रहीन माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर चारों धाम की यात्रा कराई थी. इस वीडियो ने यह साबित कर दिया है कि भारत की सनातन संस्कृति और पारिवारिक मूल्य आज भी गांवों और कस्बों में पूरी मजबूती के साथ जिंदा हैं.
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इस पूरी यात्रा (Braj 84 kosh Parikrama) के दौरान सबसे हैरान और प्रभावित करने वाली बात तब सामने आई जब रास्ते में चल रहे अन्य श्रद्धालुओं और मीडियाकर्मियों ने इस आदर्श बहू से बात करनी चाही. इस महान सेवा को करने के बावजूद उसके भीतर अहंकार का एक कतरा भी नहीं था.
उसने बेहद विनम्रता से कैमरे के सामने अपना नाम सार्वजनिक करने से साफ मना कर दिया. उसने बस हाथ जोड़कर इतना ही कहा कि इसमें मुझे कोई कष्ट या थकावट नहीं हो रही है, मैं तो बस अपनी मां (सास) की अंतिम इच्छा और मुराद पूरी कर रही हूं. इस निस्वार्थ सेवा भाव ने ब्रज में उमड़े आस्था के हुजूम को पूरी तरह से भावुक कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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