आस्था

Year Ender 2025: महाकुंभ की भगदड़ से राम मंदिर की ध्वजा तक… आस्था और हादसों के बीच कैसा रहा यह साल?

भारत जैसे देश में धर्म और आस्था सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है. साल 2025 खत्म होने वाला है, और जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह साल हमारे प्रमुख तीर्थ स्थलों के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा. इस साल हमने प्रयागराज में श्रद्धा का समंदर देखा, तो वैष्णो देवी में कुदरत का कहर भी झेला. आइए जानते हैं साल 2025 की वो बड़ी खबरें, जिन्होंने हर श्रद्धालु के दिल पर असर डाला.

साल की शुरुआत दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम ‘महाकुंभ’ से हुई. पूरा प्रयागराज ‘हर-हर गंगे’ के जयकारों से गूँज रहा था. लेकिन 3 फरवरी को मौनी अमावस्या के दिन एक ऐसी खबर आई जिसने सबको रुला दिया. संगम किनारे मची भगदड़ ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. इस हादसे के बाद प्रशासन की काफी किरकिरी हुई, लेकिन फिर सरकार ने कमर कसी और सुरक्षा के ऐसे पुख्ता इंतजाम किए कि पूरे मेले के दौरान 56 करोड़ से ज्यादा लोगों ने सुरक्षित स्नान किया. यह संख्या बताती है कि भारतीयों की आस्था किसी भी डर से कहीं बड़ी है.

वैष्णो देवी में कुदरत ने दिखाया रौद्र रूप

मई के महीने में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से एक डराने वाली खबर आई. 5 तारीख को मंदिर परिसर के दफ्तर में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई. धुआं इतना ज्यादा था कि लगा मानो कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी, लेकिन गनीमत रही कि वक्त रहते इस पर काबू पा लिया गया.

वहीं, अगस्त का महीना माता के भक्तों के लिए भारी रहा. 26 अगस्त को वैष्णो देवी के रास्ते में भारी भूस्खलन हुआ. पहाड़ से गिरते पत्थरों ने कई यात्रियों की जान ले ली. जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम और बारिश का सिलसिला ऐसा चला कि यात्रा महीनों तक प्रभावित रही और आज भी भक्त संभल-संभल कर वहां पहुंच रहे हैं.

धार्मिक नजरिए से यह साल कुछ दुर्लभ संकेतों के लिए भी याद किया जाएगा. बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में अगस्त के महीने में एक अद्भुत चमत्कार देखने को मिला. मंदिर के शिखर पर तीन दिनों तक एक सफेद उल्लू बैठा रहा. लोगों ने इसे मां लक्ष्मी का साक्षात आशीर्वाद माना और इसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी.

इसके उलट, जगन्नाथ पुरी में कुछ ऐसी हलचल हुई जिसने लोगों को चिंता में डाल दिया. अप्रैल और सितंबर में मंदिर के पवित्र ध्वज के आसपास चीलों का झुंड मंडराता दिखा. जानकारों का कहना है कि मंदिर के ऊपर इन पक्षियों का दिखना शुभ नहीं होता. साल में दो बार ऐसा होना ज्योतिषियों और भक्तों के बीच चर्चा का विषय बना रहा.

जब पूरी हुई सदियों की प्रतीक्षा

साल के अंत ने हर सनातनी के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी. 25 नवंबर को अयोध्या के राम मंदिर में वो अंतिम कड़ी भी जुड़ गई, जिसका सबको इंतजार था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराई. शास्त्रों के अनुसार, बिना ध्वजा के मंदिर पूर्ण नहीं माना जाता, इसलिए इस दिन को राम मंदिर के पूरी तरह ‘संपन्न’ होने का उत्सव माना गया.

ये भी पढ़ें: काशी विश्वनाथ जाने वाले भक्त ध्यान दें! नए साल पर बाबा के दर्शनों में हुआ बड़ा बदलाव, मंदिर प्रशासन ने लागू किए कड़े नियम

-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

Recent Posts

मेरठ में मिठाइयों के नाम पर बड़ा खेल! गुप्त तहखाने में चल रही थी नकली चांदी के वर्क की फैक्टरी

Meerut Fake Silver Foil Factory: मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र के काशी गांव में खाद्य…

19 minutes ago

30 लाख दीपों से जगमगाएगी अयोध्या, 2100 ड्रोन से आसमान में दिखेगी रामायण; दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारियां पूरी

Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में दीपोत्सव के 10वें संस्करण को भव्य बनाने की तैयारियां पूरी…

56 minutes ago