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दुर्गा पूजा में क्यों मातम क्यों मनाती है झारखंड की असुर जनजाति? जानें महिषासुर कनेक्शन

Durga Puja Jharkhand Culture: रांची/मधुकर आनंद: देश भर में जब दुर्गा पूजा के दौरान भक्त मां दुर्गा की आराधना करते हैं तब झारखंड की एक विशेष जनजाति की परंपरा इससे बिल्कुल अलग नजर आती है. गुमला और लातेहार जिलों में रहने वाली असुर जनजाति के कुछ परिवार महिषासुर को राक्षस के रूप में नहीं, बल्कि अपना राजा, पूर्वज और आराध्य मानते हैं. इसी मान्यता के चलते दुर्गा पूजा के इन दिनों में उनके घरों में उत्सव के बजाय शोक मनाने की अनूठी परंपरा देखने को मिलती है.

महिषासुर को लेकर क्या है मान्यता? (Jharkhand Mahisasur ancestor Asur community)

झारखंड के गुमला और लातेहार जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में निवास करने वाली असुर जनजाति की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत बेहद विशिष्ट पहचान रखती है. जहां मुख्यधारा की पौराणिक कथाओं में महिषासुर का वध करने वाली देवी दुर्गा का वर्णन मिलता है.

वहीं असुर समुदाय के कुछ लोग उन्हें अपना पूर्वज मानते हैं. इसी अटूट विश्वास के तहत समुदाय के लोग षष्ठी से लेकर दशमी तिथि तक शोक मनाते हैं. उनके लिए यह समय किसी भी तरह के जश्न का नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को याद करने और अपनी सांस्कृतिक स्मृतियों को संजोने का अवसर होता है. हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि यह परंपरा पूरे समुदाय में एक समान रूप से नहीं पाई जाती है, और क्षेत्रों व परिवारों के आधार पर रीति-रिवाजों में भिन्नता हो सकती है.

दीपावली पर पूर्वजों और पशुओं की पूजा (Jharkhand cultural diversity)

असुर जनजाति की सांस्कृतिक विशिष्टता केवल दुर्गा पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि दीपावली के अवसर पर भी इनके अनूठे रंग देखने को मिलते हैं. इस दौरान समुदाय के कुछ क्षेत्रों में पूर्वजों का स्मरण किया जाता है और पशुओं की पूजा की जाती है. इन सभी रीति-रिवाजों में प्रकृति, पशुधन और पूर्वजों के प्रति अगाध सम्मान की भावना साफ झलकती है.

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सांस्कृतिक विविधता की एक अनूठी मिसाल (Asur Tribe Mahisasur Ancestor Jharkhand)

असुर जनजाति झारखंड के उन प्रमुख आदिवासी समुदायों में शुमार है जो अपनी समृद्ध ऐतिहासिक पहचान के लिए जाने जाते हैं. यह परंपरा इस बात का प्रमाण है कि किसी भी ऐतिहासिक या पौराणिक पात्र को लेकर अलग-अलग समाजों और समुदायों की धारणाएं एक-दूसरे से भिन्न हो सकती हैं. यह विरासत देश की बहुसांस्कृतिकता और विविधता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है.

मधुकर आनंद, ब्यूरो चीफ़, भारत एक्सप्रेस, रांची

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