Makar Sankranti 2026: आज पूरा देश भक्ति और परंपरा के रंगों में सराबोर है. दरअसल, साल 2026 की शुरुआत में ही एक बहुत ही खास संयोग बना है. आज यानी 14 जनवरी को न केवल सूर्य देव के राशि परिवर्तन का महापर्व ‘मकर संक्रांति’ मनाया जा रहा है, बल्कि आज ही माघ मास के कृष्ण पक्ष की ‘षटतिला एकादशी’ भी है. इस दोहरे शुभ संयोग ने आज के दिन का महत्व कई गुना बढ़ा दिया है.
सुबह से ही देश के तमाम तीर्थ स्थलों, घाटों और मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा है. ठिठुरन भरी ठंड और घने कोहरे के बावजूद लोगों की आस्था पर कोई असर नहीं दिख रहा है.
मकर संक्रांति और एकादशी के इस अद्भुत मेल पर संगम नगरी प्रयागराज में सुबह से ही जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है. प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर हजारों लोग पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल के गंगासागर से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आ रही हैं. कहा जाता है कि ‘सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार’ और इसी महत्ता को देखते हुए लाखों श्रद्धालु वहां पहुंचे हैं. ममता सरकार ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी यात्री को परेशानी न हो.
देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार में नज़ारा देखने लायक है. हर की पैड़ी पर भारी कोहरे के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है. कड़ाके की ठंड में गंगा की शीतल लहरों के बीच लोग डुबकी लगाकर दान-पुण्य कर रहे हैं.
धर्म नगरी उज्जैन में भी आज विशेष रौनक है. बाबा महाकालेश्वर के मंदिर में भोलनाथ का बेहद खूबसूरत और भव्य श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए तड़के से ही लंबी कतारें लगी रहीं. इसके साथ ही चित्रकूट के घाटों पर भी मकर संक्रांति की धूम है और वहां का नजारा बेहद दिव्य लग रहा है.
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शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी में तिल का दान और उपयोग विशेष फलदायी माना जाता है. इस बार एकादशी तिथि 13 जनवरी की दोपहर 03:17 बजे से शुरू हुई थी और यह आज 14 जनवरी 2026 की शाम 05:52 बजे तक रहेगी. जो लोग इस व्रत को रख रहे हैं, उनके लिए पारण का समय कल यानी 15 जनवरी की सुबह 07:15 से 09:21 बजे के बीच रहेगा.
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है. चाहे हरिद्वार हो, प्रयागराज हो या फिर अयोध्या और चित्रकूट, सभी प्रमुख घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है और जल पुलिस भी घाटों पर तैनात है.
बता दें कि आज के दिन तिल-गुड़ के दान और खिचड़ी खाने की भी पुरानी परंपरा है. संक्रांति का यह पर्व न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत है, बल्कि यह हमारे भीतर नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार भी करता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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