Holi Chandra Grahan 2026: सोशल मीडिया पर अगर आप सक्रिय हैं, तो आपने वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज के वीडियो जरूर देखे होंगे. उनके जवाब देने का अंदाज इतना निराला और ममता भरा होता है कि परेशान से परेशान व्यक्ति को भी सुकून मिल जाता है. भक्त उनसे सिर्फ राधा-नाम की महिमा ही नहीं पूछते, बल्कि अपनी गृहस्थी और जीवन की उलझनों का हल भी मांगते हैं. हाल ही में, साल 2026 में पड़ने वाले चंद्र ग्रहण और होली के दुर्लभ संयोग को लेकर भक्तों के मन में काफी डर और शंकाएं थीं, जिनका महाराज जी ने बड़े ही सरल शब्दों में समाधान किया है.
साल 2026 का मार्च महीना आध्यात्मिक दृष्टि से काफी हलचल भरा रहने वाला है. 3 मार्च 2026 को जहां पूरा देश होलिका दहन की तैयारी में होगा, उसी दिन सिंह राशि में चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. भारतीय समय के अनुसार, यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:47 बजे तक रहेगा. लेकिन परेशानी की बात यह है कि इसका सूतक काल सुबह 9:39 बजे से ही शुरू हो जाएगा. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि त्योहार मनाएं या नियमों का पालन करें?
महाराज जी ने भक्तों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि ग्रहण से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, बस थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता है. उन्होंने समझाया कि ग्रहण के दौरान बाहरी वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा (अशुद्धि) बढ़ जाती है. इससे बचने का सबसे सरल और अचूक तरीका है- नाम जाप.
महाराज जी कहते हैं, “आप चाहे गुरु मंत्र का जाप करें, गायत्री मंत्र पढ़ें या बस अपने इष्ट देव का नाम लें. यह नाम जाप आपके चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा कवच बना देता है जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती.” उनके अनुसार, यह समय डरने का नहीं बल्कि अपनी मानसिक शक्ति और एकाग्रता को बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर है.
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सिर्फ ग्रहण के वक्त ही नहीं, महाराज जी ने पूरे दिन की एक व्यवस्थित दिनचर्या बताई है:
शुरुआत: ग्रहण शुरू होने से करीब एक घंटा पहले स्नान करके साफ कपड़े पहन लें.
साधना: घर के किसी शांत कोने या पूजा स्थल पर आसन बिछाकर बैठ जाएं और प्रभु के ध्यान में डूब जाएं.
शुद्धि: ग्रहण खत्म होने के तुरंत बाद काम पर न लगें. कम से कम आधा घंटा और जाप जारी रखें. इसके बाद दोबारा स्नान करना अनिवार्य है. जब तन और मन दोनों शुद्ध हो जाएं, तभी भोजन ग्रहण करें.
ज्योतिषीय गणना कहती है कि होली और ग्रहण का यह संयोग दुर्लभ है. जहां दुनिया इसे अशुभ मानकर डर रही है, वहीं महाराज जी के अनुयायी इसे एक बड़ी साधना के अवसर के रूप में देख रहे हैं. महाराज जी का स्पष्ट संदेश है कि जब मंदिरों के पट बंद हों और बाहर सूतक का प्रभाव हो, तब अपने ‘मन के मंदिर’ को खोलें. मानसिक रूप से किया गया भगवान का स्मरण इस काल में कई गुना ज्यादा फलदायी होता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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