Sawan 2nd Somwari
Sawan 2nd Somwari: भागलपुर के सुल्तानगंज में सावन की दूसरी सोमवारी पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला. गंगा घाट से लेकर कांवरिया पथ तक हर तरफ भगवा रंग नजर आया. उत्तरवाहिनी गंगा में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई तो कांवरियों के जत्थे ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ देवघर की ओर रवाना हुए.
सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा को धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि यहां गंगा का प्रवाह उत्तर दिशा की ओर होने के कारण इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व है. श्रद्धालु पहले गंगा स्नान कर पवित्र जल भरते हैं और फिर इसी जल को बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करने के लिए करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकलते हैं.
सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम भी इस पूरी यात्रा का महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है. मान्यता है कि बाबा अजगैबीनाथ भगवान शिव का ही स्वरूप हैं. यहां श्रद्धालु गंगाजल भरने से पहले मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस क्षेत्र का संबंध भगवान शिव और अंग प्रदेश की प्राचीन धार्मिक परंपराओं से माना जाता है. यही वजह है कि सावन के महीने में अजगैबीनाथ धाम में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
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गंगा से जल भरने के बाद कांवरिया बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक के लिए देवघर की ओर निकल पड़ते हैं. करीब 105 किलोमीटर की यह यात्रा कठिन मानी जाती है. कई श्रद्धालु नंगे पैर चलते हैं, जबकि डाक बम बिना रुके अपनी रफ्तार से देवघर की ओर बढ़ते हैं. श्रावणी मेले की शुरुआत से अब तक 22 लाख से ज्यादा कांवरिया सुल्तानगंज से देवघर के लिए रवाना हो चुके हैं. वहीं दूसरी सोमवारी से पहले करीब एक लाख डाक बम भी बाबा की नगरी की ओर रवाना हुए.
अजगैबीनाथ धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही. मंदिर परिसर से लेकर गंगा घाट तक पूरा इलाका भक्तिमय नजर आया. जो श्रद्धालु देवघर की यात्रा नहीं कर पा रहे हैं, वे अजगैबीनाथ धाम में पूजा कर गंगाजल के साथ बाबा का आशीर्वाद ले रहे हैं.
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं. गंगा घाट और कांवरिया पथ पर सुरक्षा के साथ साफ-सफाई, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है. सुल्तानगंज से देवघर तक बढ़ता कांवरियों का यह कारवां सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की ऐसी परंपरा है, जिसमें हर कदम बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक के संकल्प के साथ आगे बढ़ता है.
भारत एक्सप्रेस
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