आस्था

जन्माष्टमी पर गीता का संदेश- फल की इच्छा छोड़ सत्य और धर्म के मार्ग पर चलें

16 अगस्त को देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ उनके उपदेशों को जीवन में अपनाना विशेष महत्व रखता है. गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जीवन के गहरे सत्य बताए, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने महाभारत काल में थे.

धर्म के अनुसार कर्म करने पर जोर

भगवान कृष्ण ने सबसे बड़ा संदेश दिया,फल की इच्छा किए बिना अपने धर्म के अनुसार कर्म करो. (गीता- अध्याय 3, श्लोक 8) उन्होंने कहा कि मोह और क्रोध बुद्धि का नाश करते हैं. (गीता- अध्याय 2, श्लोक 62–63) इच्छा से क्रोध, क्रोध से मोह, मोह से स्मृति का नाश और अंततः बुद्धि का नाश हो जाता है. जब बुद्धि नष्ट होती है तो व्यक्ति का जीवन संकट में पड़ जाता है.

आज के समय में हम अक्सर दूसरों की राय पर अपनी खुशी और दुख निर्भर कर देते हैं. सोशल मीडिया पर लाइक्स और प्रशंसा पाने की चाह हमें मानसिक रूप से निर्भर बना देती है. गीता इस आदत को ‘तृष्णा’ कहती है- एक ऐसी प्यास जो कभी बुझती नहीं. श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो व्यक्ति न प्रशंसा से प्रसन्न होता है, न निंदा से दुखी, वही सच्चा संतुलन पाता है (गीता- अध्याय 12, श्लोक 19).

खुश करने की आदत से आती है अशांति

श्रीकृष्ण का यह भी संदेश है कि सभी को खुश करने की कोशिश हमें अशांति देती है. जब हम दूसरों को खुश करने के लिए खुद को बदलते हैं, तो हम अपनी शांति उनके हाथों में सौंप देते हैं. इसके बजाय हमें सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए. भले ही यह रास्ता कठिन हो और लोग हमें गलत समझें, लेकिन अंततः यही सच्ची शांति का मार्ग है.

गीता कहती है कि मोक्ष किसी की स्वीकृति से नहीं, बल्कि अपनी सच्चाई से मिलता है. इस जन्माष्टमी, यदि हम अपने जीवन में श्रीकृष्ण के उपदेश- निष्काम कर्म, मोह-क्रोध से बचाव और सत्य के पालन को अपनाएं, तो हम न केवल मानसिक शांति पाएंगे बल्कि जीवन को भी सही दिशा दे सकेंगे.

ये भी पढ़े: 16 अगस्त को भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर पालन करें ये व्रत और संकल्प

भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

Recent Posts