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Utpanna Ekadashi Katha: भगवान विष्णु की आराधना का आज विशेष दिन, व्रत की कथा पढ़े बिना अधूरी मानी जाती है पूजा

Utpanna Ekadashi Katha: हिंदू पंचांग में एकादशी तिथि को बेहद पवित्र माना गया है. यह दिन खास तौर पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है. मान्यता है कि एकादशी के उपवास से न सिर्फ मन और शरीर शुद्ध होते हैं, बल्कि भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति भी मिलती है. उत्पन्ना एकादशी पर व्रत रखना अत्यंत फलदायी माना जाता है और इस दिन की कथा सुनना या पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है. इस व्रत की पूरी कथा नीचे दी गई है, आप इसे पूजन के दौरान भगवान के सामने बैठकर पढ़ सकते हैं.

उत्पन्ना एकादशी की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एकादशी की उत्पत्ति स्वयं भगवान विष्णु के शरीर से हुई. यह कथा उस समय की है जब सतयुग में मुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली और अहंकारी दैत्य उत्पन्न हुआ. उसके बढ़ते आतंक से देवता भयभीत हो गए. वह इतना शक्तिशाली हो गया था कि इंद्र सहित कई देवताओं को उसने पराजित कर दिया. जब स्थिति हाथ से निकलने लगी, तो सभी देवताओं ने भगवान शिव की शरण ली और अपनी समस्या बताई.

भगवान शिव ने देवताओं से कहा कि इस संकट का समाधान केवल भगवान विष्णु ही कर सकते हैं, इसलिए वे उनकी शरण लें. शिवजी की सलाह मानते हुए सभी देवता क्षीरसागर पहुंचे, जहां भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे.

विष्णु जी ने दिया आश्वासन

देवताओं की विनती सुनकर भगवान विष्णु ने पूछा कि ऐसा कौन सा दैत्य है जिसने सभी देवताओं को पराजित कर दिया है? तब इंद्र ने बताया कि प्राचीन समय का राक्षस नाड़ीजंघ का पुत्र मुर, अपने अत्याचारों से स्वर्गलोक पर कब्जा कर चुका है और देवताओं को भगा चुका है.

भगवान विष्णु ने तुरंत आश्वासन दिया कि वे इस अत्याचारी दैत्य का अंत अवश्य करेंगे. इसके बाद सभी देवता और भगवान विष्णु दैत्य मुर के राज्य, चंद्रावती की ओर प्रस्थान कर गए.

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10,000 वर्षों तक चला भयानक युद्ध

दैत्य मुर ने विशाल सेना के साथ युद्धभूमि में प्रवेश किया और देवताओं पर आक्रमण किया. दोनों पक्षों के बीच संघर्ष 10,000 वर्षों तक चलता रहा. लंबी लड़ाई के बाद भगवान विष्णु हेमवती नाम की एक गुफा में आराम के लिए गए और वहीं योगनिद्रा में लीन हो गए.

मुर उन्हें ढूंढते हुए गुफा तक पहुंच गया. जैसे ही उसने सोए हुए भगवान पर वार करने की कोशिश की, तभी एक अद्भुत घटना घटी.

भगवान विष्णु की देह से प्रकट हुईं दिव्य देवी

भगवान के शरीर से एक तेजस्वी और अत्यंत उज्जवल देवी प्रकट हुईं. इस देवी ने मुर को चुनौती दी और उसके साथ जोरदार युद्ध किया. कुछ ही देर में देवी ने उस क्रूर दैत्य का अंत कर दिया.

जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागे और पूरी घटना जानी, तो वे अत्यंत प्रसन्न हुए. उन्होंने देवी से कहा कि चूंकि आप एकादशी के दिन प्रकट हुई हैं, इसलिए आपका नाम उत्पन्ना एकादशी होगा और संसार के लोग आपकी पूजा करेंगे.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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