2027 World Cup Plan: भारतीय क्रिकेट में इस समय 15 साल के वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi ) को टीम इंडिया में शामिल करने को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है. सवाल यह है कि क्या भविष्य की तैयारियों के लिए लगातार रन बना रहे सीनियर खिलाड़ियों को ड्रॉप करना सही होगा.
वैभव सूर्यवंशी जैसी असाधारण प्रतिभा के लिए चयन का पैमाना सीनियरों के साथ ‘न्याय’ करने के बजाय ‘भविष्य की जरूरत’ होना चाहिए. 2027 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए वैभव को जरूरत से ज्यादा सावधानी बरतकर इंतजार कराने के बजाय सही समय पर मौका देना ही समझदारी होगी.
बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक का मानना है कि लगातार रन बनाने वाले खिलाड़ी को किसी नए चेहरे के लिए ड्रॉप करना गलत होगा. यह तर्क नैतिक रूप से सही लगता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का चयन कोई पुरस्कार वितरण समारोह नहीं है. यहां पिछली उपलब्धियों का सम्मान तो होता है, लेकिन भविष्य की जगह की गारंटी नहीं मिलती.
इतिहास गवाह है कि अगर चयन की कसौटी सिर्फ ‘न्याय’ होती, तो शायद 16 साल के सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली या जसप्रीत बुमराह को कभी इतनी जल्दी मौका नहीं मिलता. राष्ट्रीय टीम में चयन का दूसरा नाम ही निर्दयता है, जहां हर नई प्रतिभा पुराने खिलाड़ी की कुर्सी के सामने चुनौती बनकर खड़ी हो जाती है.
वैभव सूर्यवंशी की चर्चा इसलिए खास है क्योंकि वे केवल रन नहीं बना रहे, बल्कि खेल की धारणाएं बदल रहे हैं. 15 साल की उम्र में जोफ्रा आर्चर, पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जैसे गेंदबाजों का सामना करने की उनकी क्षमता उन्हें कतार में सबसे आगे खड़ा करती है. हालांकि, इस बहस का दूसरा पहलू भी उतना ही मजबूत है. यदि रन बनाने के बाद भी खिलाड़ियों की जगह सुरक्षित नहीं रहेगी, तो ड्रेसिंग रूम में असुरक्षा की भावना पैदा होगी, जिससे भारत की मौजूदा ‘बेखौफ खेलने की संस्कृति’ प्रभावित हो सकती है.
कप्तान और कोच की असली परीक्षा यही है कि वे सही टीम चुनने के साथ-साथ बाहर बैठने वाले खिलाड़ियों का भरोसा भी बनाए रखें. लेकिन यदि टीम प्रबंधन वैभव सूर्यवंशी को 2027 के वनडे विश्व कप की योजनाओं में देख रहा है, तो उसकी जमीन अभी से तैयार करनी होगी. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव मैदान पर उतरकर और गलतियों से सीखकर ही आता है.
वैभव के मामले में सबसे बड़ी भूल जल्दबाजी करना नहीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा सावधानी बरतना हो सकती है. इतिहास की सबसे बड़ी भूल किसी गलत खिलाड़ी को चुनना नहीं, बल्कि सही खिलाड़ी को पहचानने में बहुत देर कर देना होती है. वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी वे दुर्लभ रत्न हैं, जिनके लिए टीम में जगह ढूंढी नहीं जाती, बल्कि जगह बनाई जाती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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