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Google और ChatGPT की छुट्टी! भारत के नए AI ‘Vision’ और ‘Bulbul’ ने गाड़े सफलता के झंडे

जब भी आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस यानी AI की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले अमेरिका की दिग्गज कंपनियों जैसे Google के Gemini या OpenAI के ChatGPT का नाम आता है. ऐसा लगता था कि भारत इस रेस में सिर्फ एक यूजर बनकर रह जाएगा, लेकिन बेंगलुरु के एक स्टार्टअप ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. ‘Sarvam AI’ नाम की इस कंपनी ने ऐसे स्वदेशी टूल्स तैयार किए हैं, जो भारतीय भाषाओं और दस्तावेजों को समझने के मामले में दुनिया के सबसे बड़े मॉडल्स से भी दो कदम आगे निकल गए हैं.

Sarvam Vision: भारतीय दस्तावेजों का ‘एक्स-रे’

आमतौर पर देखा गया है कि ChatGPT या Gemini अंग्रेजी में तो बहुत अच्छा काम करते हैं, लेकिन जब बात भारतीय भाषाओं, हाथ से लिखे दस्तावेजों या पेचीदा सरकारी कागजों की आती है, तो ये ग्लोबल मॉडल्स अक्सर लड़खड़ा जाते हैं. यहीं पर काम आता है ‘Sarvam Vision’. यह एक OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) टूल है, जिसका काम तस्वीरों या स्कैन किए हुए कागजों से टेक्स्ट को पढ़ना है.

हैरानी की बात यह है कि डेटा और बेंचमार्क के मामले में इसने दिग्गजों को धूल चटा दी है. ‘olmOCR-Bench’ जैसे कड़े टेस्ट में Sarvam Vision ने 84.3% की सटीकता हासिल की, जो Google Gemini 1.5 Pro और DeepSeek जैसे मॉडल्स से कहीं ज्यादा है. चाहे गणित के जटिल फॉर्मूले हों, उबड़-खाबड़ टेबल हों या मुश्किल लेआउट, यह टूल हर चीज को 93.28% की एक्यूरेसी के साथ पढ़ लेता है.

‘बुलबुल’ की आवाज में दिखेगी देसी मिठास

सिर्फ पढ़ने में ही नहीं, ‘Sarvam AI’ सुनने और बोलने में भी कमाल कर रहा है. कंपनी ने अपना नया वॉइस मॉडल ‘Bulbul V3’ लॉन्च किया है. यह एक टेक्स्ट-टू-स्पीच टूल है जो लिखे हुए शब्दों को आवाज देता है. इसकी खासियत यह है कि यह किसी रोबोट की तरह नहीं, बल्कि एक इंसान की तरह स्वाभाविक और भावपूर्ण तरीके से बोलता है.

फिलहाल, बुलबुल 11 भारतीय भाषाओं में 35 से ज्यादा अलग-अलग आवाजों में बात कर सकता है. कंपनी का लक्ष्य इसे जल्द ही 22 भाषाओं तक ले जाने का है. सबसे बड़ी बात यह है कि ग्लोबल टूल जैसे ‘ElevenLabs’ भारतीय भाषाओं के लिए बहुत महंगे पड़ते हैं, जबकि बुलबुल न सिर्फ सस्ता है बल्कि भारतीय लहजे (Accent) को भी बेहतर समझता है.

एक्सपर्ट्स हुए कायल

शुरुआत में कई टेक एक्सपर्ट्स को लगा था कि भारत में अपना अलग AI मॉडल बनाना समय की बर्बादी है, लेकिन अब वे भी अपनी गलती मान रहे हैं. मशहूर टेक कमेंटेटर डीड़ी दास ने स्वीकार किया कि उन्होंने Sarvam को कम आंका था. उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के लिए इस स्टार्टअप ने वो कर दिखाया है जिसे ग्लोबल लैब्स ने अब तक नजरअंदाज किया था. वहीं, KissanAI के फाउंडर प्रतीक देसाई का कहना है कि वे अपने काम के लिए अब ‘बुलबुल’ का ही इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि यह विदेशी टूल्स के मुकाबले ज्यादा सटीक और किफायती है.

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-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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