उत्तर प्रदेश

यूपी की सियासत में हाथी की चाल पर कांग्रेस की नजर, क्या राहुल गांधी लगा पाएंगे मायावती के किले में सेंध?

उत्तर प्रदेश की सियासत में दलित वोटबैंक हमेशा से बेहद अहम रहा है. चुनाव नजदीक आते ही लगभग हर पार्टी इस वर्ग को अपने पक्ष में करने की कोशिश करती है. इसी कड़ी में अब कांग्रेस ने भी एक नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. पार्टी ने बहुजन आंदोलन के बड़े नेता कांशीराम के जन्मदिन को ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है. माना जा रहा है कि इसके जरिए कांग्रेस दलित समाज तक एक बड़ा राजनीतिक संदेश पहुंचाना चाहती है.

इस पूरे अभियान की जमीन तैयार करने के लिए कांग्रेस ने लखनऊ को अपना केंद्र बनाया है. 15 मार्च को कांशीराम साहब का जन्मदिन है, लेकिन पार्टी ने इसकी शुरुआत दो दिन पहले यानी 13 मार्च से ही करने का फैसला किया है. लखनऊ के गोमती नगर स्थित ‘इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान’ के जुपिटर हॉल में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है.

इस आयोजन की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें खुद लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल होंगे. राहुल का यहां आना इस बात का साफ संकेत है कि दिल्ली के गलियारों से लेकर लखनऊ की सड़कों तक, कांग्रेस अब दलित और पिछड़े वर्ग के मुद्दों को छोड़ने के मूड में नहीं है.

क्या है कांग्रेस का प्लान?

यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय का मानना है कि आज राज्य की राजनीति में एक बड़ा वैक्यूम (खाली जगह) बन गया है. दलित समाज का एक बड़ा तबका अब खुद को सियासी तौर पर अकेला महसूस कर रहा है. कांग्रेस इसी मौके को भुनाना चाहती है.

पार्टी का प्लान केवल एक दिन का प्रोग्राम करने का नहीं है, बल्कि 15 मार्च से एक हफ्ते तक पूरे प्रदेश में सामाजिक कार्यक्रमों की झड़ी लगा दी जाएगी. राहुल गांधी पिछले काफी समय से ‘जातिगत जनगणना’ और ‘जितनी आबादी-उतना हक’ जैसे नारों के जरिए जिस सामाजिक न्याय की बात कर रहे हैं, कांशीराम जयंती का यह मौका उसी नैरेटिव को आगे बढ़ाने की एक बड़ी कड़ी है.

मायावती के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की यह सक्रियता सीधे तौर पर बीएसपी (BSP) के लिए खतरे की घंटी है. दलित वोट बैंक, जो कभी कांग्रेस का मजबूत आधार हुआ करता था और बाद में पूरी तरह मायावती के पाले में चला गया, अब एक बार फिर अपनी जड़ों की तलाश में है. कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर वे दलितों को यह समझाने में कामयाब रहे कि उनकी असली लड़ाई राहुल गांधी लड़ रहे हैं, तो 2027 के विधानसभा चुनाव की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है.

ये भी पढ़ें: ‘जीजा ने पकड़ा, यह बस एक सपना था’: नाबालिग साली के बयान से पलटा केस, एयरफोर्स कर्मी 7 साल बाद बरी

-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

Recent Posts

कौन है ओलंपियन परगट सिंह, जिनके हाथों में है अब पंजाब कांग्रेस की कमान?

पूर्व ओलंपियन और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का नया प्रदेश…

7 hours ago

गांधी जयंती पर सीएम फडणवीस ने किया ‘एक्सपीरियंस सेंटर’ का उद्घाटन, देखिए कैसा होगा नया धारावी

गांधी जयंती पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने 'धारावी एक्सपीरियंस सेंटर' का उद्घाटन किया. 22,500 वर्ग…

8 hours ago

भोपाल में 3 अक्टूबर से लगेगी देश की अनोखी पुलिस प्रदर्शनी, गृह मंत्री अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

भोपाल के बीएचईएल मैदान में 3 से 7 अक्टूबर तक नवीन न्याय संहिताओं पर प्रदर्शनी…

9 hours ago

प्रेमानंद महाराज के आश्रम के बाहर धरने पर बैठा परिवार, 3 महीने से लापता है 16 साल का इकलौता बेटा

Premanand Maharaj Ashram: वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के श्री राधा केली कुंज आश्रम से…

10 hours ago