मिसाइल नहीं माइंस हैं ईरान के असली हथियार! (तस्वीर-AI जेनरेटेड)
Iran US Conflict: अमेरिका और इजरायल का ईरान पर हमले के साथ शुरू हुआ संघर्ष अब अपने चरम पर पहुंच चुका है. जवाब में ईरान, अमेरिका और इजरायल के मध्य पूर्व में मौजूद ठिकानों पर जमकर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर रहा है. इसके साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर वहां बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं. ताकि वहां से गुजरने वाले अमेरिकी और इजरायली जहाजों को निशाना बनाया जा सके. हालांकि अमेरिका इन बारूदी सुरंगों को बिछाने वाले कई जहाजों को नष्ट कर दिया है.
अमेरिका ने दावा किया है कि उसने 16 ईरानी माइनलेयर्स को नष्ट कर दिया है. ये माइनलेयर्स इतने घातक हैं कि जहाजों को बीच से फाड़ सकते हैं. बताया जाता है कि भारत के पास इस तरह की बारूदी सुरंगें बिछाने वाली एक भी माइनलेयर्स नहीं है. जबकि ईरान के पास इसका पूरा जखीरा मौजूद है. हालांकि ईरान ने इसके आंकड़े तो नहीं जारी किये हैं, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक उसके पास ऐसे सैकड़ों मौजूद हैं. एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 5000-6000 समुद्री माइंस बिछा रखी हैं. जो इतनी ताकतवर हैं कि एक ही वार में अमेरिकी जहाजों को नष्ट कर सकती हैं.
समुद्री माइंस को मुख्य रूप से दो रूपों में बांटा जाता है. पहला लेइंग माइन और दूसरा स्टॉक्स माइन. ईरान के पास दोनों प्रकार की माइंस मौजूद हैं. इनमें से कई माइंस को ईरान ने सालों पहले सोवियत के समय कराक के तहत निर्माण किये थे. इसके अलावा ईरान ने चीन से भी कई तरह की माइंस खरीदी हैं.
समुद्री माइंस तीन तरह से समुद्र में फटती हैं. पहला टकराने से, दूसरा पास आने से और तीसरा आवाज या चुंबक या दबाव के माध्यम से. ईरान ने स्ट्रेट ऑप होर्मुज में दोनों तरह की माइंस बिछा रखा है.
रक्षा क्षेत्र को कवर करने वाली Sino Defence वेबसाइट ने अमेरिकी एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया है कि ईरान के हथियार भंडार में कम से कम 2000 समुद्री माइंस हैं. जो बेहद एडवांस हैं. ये हथियार उसने चीन और रूस से खरीदे हैं.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक ईरान इन समुद्री बारूदी सुरंगों का तेल टैंकरों के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है. इससे दुनिया में तेल का सप्लाई चेन प्रभावित हुआ है. खुले समुद्र में इनकी मारक क्षमता कम हो जाती है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट जैसे काफी छोटी जगह में इसकी मारक क्षमता बेहद कारगर है.
ईरान को पता है कि समुद्री जहाजों को नष्ट करने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली टॉरपीडो या एंटी शिप क्रूज मिसाइलों में उसका हाथ तंग है. ऐसे में समुद्री बारूदी सुरंगों का उपयोग काफी किफायती और आसान है.
ईरान ने दावा किया है कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई प्रकार की माइंस बिछा रखी है, जिसमें रिमोट कंट्रोल्ड, नॉन मैग्नेटिक और फ्री फ्लोटिंग माइंस शामिल हैं. इसके अलावा चीन ने भी ईरान की सुद्री बारूदी सुरंगों की फैक्ट्री लगाने में मदद की है.
भारत के पास समुद्र में माइंस लगाने के लिए माइन लेयर शिफ फिलहाल नहीं है. पहले भारतीय नौसेना के पास माइंस स्वीपर थे, जो समुद्र में माइंस बिछा सकते थे. हालांकि भारत के पास कई एंटी सबमरीन वायरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट हैं. जो माइंस बिछाने की क्षमता रखते हैं. ये जहाज भारतीय नौसेना ने दुश्मन की सबमरीन को उथले पानी में खोजने और खत्म करने के लिए बनाये हैं. जिसमें कई आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.
-भारत एक्सप्रेस
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