बाल भिक्षावृत्ति समाज पर कलंक है, एवं इसके उन्मूलन तथा बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए लखनऊ प्रशासन द्वारा चलाए गए बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन कार्यक्रम में सक्रिय योगदान देने के लिए लखनऊ के के. डी. सिंह स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्क्वाड्रन लीडर डॉ तूलिका रानी को सम्मानित किया. तूलिका रानी इस कार्य के लिए प्रशासन द्वारा बनाए गए नौ सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल का हिस्सा थीं.
डॉ तूलिका रानी ने इस दिशा में लखनऊ प्रशासन के अथक प्रयासों की सराहना करते हुए सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया तथा इसे उन सभी परिजनों को समर्पित किया जिन्होंने भिक्षावृत्ति (Child labour) के दुष्परिणामों को समझते हुए अपने बच्चों को इससे हटाकर प्रशासन की सहायता से विद्यालय में दाखिला दिलाया. प्रशासन द्वारा इन परिजनों को भी स्वाबलंबी बनने के साधन उपलब्ध कराए गए.
डॉ तूलिका रानी ने इस कार्यक्रम में विचार विमर्श, अपने व्यावहारिक सुझावों एवं जनमानस में व्यापक स्तर पर जागरूकता का प्रचार प्रसार कर सक्रिय भूमिका निभाई. लखनऊ के जिलाधिकारी श्री विशाख जी के दिशानिर्देश में लखनऊ प्रशासन द्वारा विशेषज्ञों, स्वयंसेवी दस्तों एवं मीडिया की सहायता से चलाए गए इस अभियान से अभी तक करीब सात सौ पचास बच्चों को भिक्षावृत्ति से निकालकर स्कूल में दाखिला कराया जा चुका है.
उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान की टीम को सम्मानित करते हुए लखनऊ प्रशासन की इस पहल एवम् सफ़ल प्रयासों की भावभीनी सराहना की एवं आगे भी इसमें पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया.
ज्ञात हो कि स्क्वाड्रन लीडर डॉ तूलिका रानी पहले भी सरकार एवं प्रशासन की विविध योजनाओं में समाज की प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में प्रतिभाग कर सक्रिय योगदान देती रहीं हैं. २०२३ में उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की जी २० ब्रांड अम्बेसडर रहते हुए उन्होंने चालीस से अधिक उच्च शिक्षा संस्थानों में व्याख्यान देकर जागरूकता का प्रसार किया. साथ ही वह विधान सभा चुनावों एवं लोक सभा चुनावों में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से चुनाव आयोग के वोटर जागरूकता कार्यक्रम स्वीप की भी ब्रांड अम्बेसडर रही हैं.
वह एक पूर्व भारतीय वायु सेना अधिकारी होने के साथ साथ पर्वतारोही, अंतराष्ट्रीय प्रेरणादाई वक्ता, लेखिका तथा इतिहास की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वह उत्तर प्रदेश से माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण करने वाली प्रथम महिला तथा ईरान में स्थित एशिया के सर्वोच्च ज्वालामुखी पर तिरंगा फहराने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं. उनकी आठ पुस्तकें तथा पंद्रह शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं तथा हाल ही में उन्हें भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा उत्तर प्रदेश में थारू जनजाति की महिलाओं पर शोध कार्य के लिए चयनित किया गया है.
भारत एक्सप्रेस
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