उत्तर प्रदेश

‘पंडित’ को दिया टिकट तो भड़कीं मायावती! लगाई सपा की PDA क्लास

Mayawati news: उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे राज्य में राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है. शनिवार (8 अगस्त) को बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने समाजवादी पार्टी को घेरते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. बता दें कि हाल ही में सपा ने अयोध्या में ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए पवन पांडेय को उम्मीदवार बनाया है, जिसे लेकर मायावती ने अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और सपा की पीडीए वाली क्लास लगा दी.

पी का मतलब पिछड़ा या अपकॉस्ट?

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए उस पर संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने और चुनावी फायदे के लिए अपना रुख बदलने का आरोप लगाया है. मायावती ने कहा कि बीएसपी की राजनीति ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित है और पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपनी चारों सरकारें इसी विचारधारा के आधार पर चलाई हैं.

मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बीएसपी सर्वसमाज के हितों को ध्यान में रखने वाली अंबेडकरवादी पार्टी है. इसके विपरीत सपा अपने राजनीतिक स्वार्थ और जातिगत समीकरणों के अनुसार लगातार अपना रुख बदलती रहती है.

उन्होंने सपा के ‘पीडीए’ को लेकर भी सवाल उठाए. मायावती के मुताबिक, सपा ने पहले पीडीए में ‘पी’ का मतलब पिछड़ा बताया था, लेकिन अब अपरकास्ट समाज, खासकर ब्राह्मण समुदाय के लोगों का बीएसपी से बढ़ता जुड़ाव देखकर पार्टी ने ‘पी’ का अर्थ ‘पंडित’ बताना शुरू कर दिया है. उन्होंने इसे सपा की राजनीति में बदलाव और राजनीतिक छलावे का उदाहरण बताया.

बीएसपी प्रमुख ने कहा कि इस तरह की राजनीति से किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को कुछ समय के लिए फायदा मिल सकता है, लेकिन इससे समाज का स्थायी कल्याण नहीं हो सकता. उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से ऐसी राजनीति और जातीय आधार पर किए जाने वाले राजनीतिक प्रयोगों से सतर्क रहने की अपील की.

सपा ने उतारा ब्राह्मण प्रत्याशी

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. इसी बीच समाजवादी पार्टी ने अयोध्या विधानसभा सीट से पवन पांडेय को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. खास बात यह है कि सपा की ओर से घोषित किए गए शुरुआती उम्मीदवारों में पवन पांडेय का नाम सामने आया है और पार्टी ने ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाया है.


ये भी पढ़ें: अखिलेश यादव का ब्राम्हण कार्ड: कौन हैं पवन पांडे? जिन्हें आयोध्या से बनाया उम्मीदवार


सियासी जानकार इस फैसले को आगामी चुनाव के लिए अखिलेश यादव की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं. माना जा रहा है कि अयोध्या जैसी अहम सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी को मैदान में उतारकर सपा ने इस वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की है. पार्टी के इस कदम को बीजेपी के प्रभाव वाले क्षेत्र में चुनावी समीकरण साधने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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